Varuny Yoga - इस योग में कार्य आरंभ करने से कभी नहीं मिलती असफलता DA Image

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इस योग में कार्य आरंभ करने से कभी नहीं मिलती असफलता

चैत्र मास में कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि को वारुणी पर्व मनाया जाता है। कहा जाता है कि वारुणी योग में मुश्किल से मुश्किल काम भी बन जाते हैं। इस दिन तीर्थ स्थानों पर स्नान-दान का विशेष महत्व है। इस दिन कोई भी नया कार्य आरंभ किया जा सकता है। इस दिन नया व्यापार भी आरंभ कर सकते हैं।

वारुणी योग में भगवान शिव की पूजा कर शिक्षा से संबंधित कार्य प्रारंभ किए जाते हैं। इस योग में कार्य प्रारंभ करने से कभी असफलता का सामना नहीं करना पड़ता है। इस दिन शिवलिंग पर गंगा जल अर्पित करें। मान्यता है कि इस दिन तीर्थ स्थानों में स्नान, दान और उपवास करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र स्नान के बाद भगवान शिव की पूजा की जाती है। इस पर्व को मनाने से पापों से मुक्ति मिलती है। वारुणी योग को दुर्लभ माना गया है। वारुणी योग चैत्र माह में बनने वाला अत्यंत पुण्यप्रद महायोग है। वारुणी योग का वर्णन स्कंद पुराण, शिव पुराण में भी मिलता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से सुख एवं ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने का संयोग ना बन पाए तो अपने घर में ही पवित्र नदियों का जल लेकर स्नान करें।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।

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