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14 दिसंबर, 2019|6:47|IST

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Utpanna Ekadashi: उत्पन्ना एकादशी आज, जानें एकादशी तिथि और इसका महत्व

हिन्दु कैलेंडर और पंचांग के अनुसार, आज  उत्‍पन्ना एकादशी 2019 है। मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष एकादशी को उत्पन्न एकादशी के रूप में मनाया जाता है। यह एकादशी इस बार 22 नवंबर दिन शुक्रवार को है। इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी होने के पीछे मान्यता है कि आज के दिन ही एकादशी माता का जन्म हुआ था। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा, अराधना और व्रत से विशेष कृपा पाप्त होती साथ मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। देवी एकादशी को सृष्टि के पालनहार श्री हर‍ि विष्‍णु की ही एक शक्ति माना जाता है्र। कहते हैं कि इस दिन मां एकादशी ने उत्‍पन्न होकर अतिबलशाली और अत्‍याचारी राक्षस मुर का वध किया था। कहा जाता है कि इस दिन स्‍वयं भगवान विष्‍णु ने माता एकादशी को आशीर्वाद देते हुए इस व्रत को पूज्‍यनीय बताया था। इस एकादशी (Ekadashi) के व्रत के प्रभाव से सभी पापों का नाश हो जाता है।

उत्‍पन्ना एकादशी तिथि: 
उत्तर भारत में इस उत्पन्ना एकादशी 22 नवंबर  2019 को है

एकादशी तिथि प्रारंभ: 22 नवंबर 2019 को सुबह 09 बजकर 01 मिनट से
एकादशी तिथि समाप्‍त: 23 नवंबर 2019 को सुबह 06 बजकर 24 मिनट तक
पारण का समय: 23 नवंबर 2019 को दोपहर 01 बजकर 10 मिनट से दोपहर 03 बजकर 15 मिनट तक 


उत्‍पन्ना एकादशी का महत्‍व 
हिन्‍दू धर्म को मानने वालों में उत्‍पन्ना एकादशी का खास महत्‍व है। मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से मनुष्‍य के सभी पाप नष्‍ट हो जाते हैं। जो लोग एकादशी का व्रत करना चाहते हों उन्हें उत्‍पन्ना एकादशी से ही व्रत की शुरुआत करनी चाहिए। आपको बता दें कि साल में 24 एकादशियां पड़ती हैं और हर महीने दो एकदाशी आती हैं। श्री हरि विष्‍णु की जीत की खुशी में भी इस एकादशी को मनाया जाता है. इस एकादशी में भगवान विष्‍णु और माता एकादशी का विधि-विधान से पूजन किया जाता है। 

 

एकादशी पूजा विधि:

इस दिन भगवान श्री हरि की पूजा की जाती है। प्रात: स्नानादि करने के बाद भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित कर उनकी धूप, दीप, पुष्प, चंदन, फूल, तुलसी से पूजा करें। यदि आप व्रत कर रहे हैं तो पूरे दिन भगवान विष्णु को ध्यान करने उनसे संबंधित धार्मकि पुस्तकें पढ़ने में समय लगाना चाहिए। आज के दिन नदी, तालाब व पोखरों से स्नान करना काफी शुभ माना जाता है। ऐसा करने से सारे दोषों का नाश होता है और मनचाहा वरदान प्राप्त होता है। पूजा में तुलसी के पत्ते जरूर अर्पित करें क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी अति प्रिय है। भगवान विष्णु की कथा पढ़े या अगर कोई अन्य पढ़ रहा है तो ध्यान से सुनें। द्वादशी के दिन ब्राह्मणों को भोजन कराएं, कलश दान करें और व्रत खोलें।

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