Utpanna ekadashi 2019 puja vidhi and significance of this auspicious day - Utpanna Ekadashi 2019 : इस व्रत की ऐसे हुई थी शुरुआत, विधि-विधान से पूजा करने पर होती है मनोकामना पूरी DA Image
15 दिसंबर, 2019|11:58|IST

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Utpanna Ekadashi 2019 : इस व्रत की ऐसे हुई थी शुरुआत, विधि-विधान से पूजा करने पर होती है मनोकामना पूरी

हिन्दू धर्म में हर व्रत-त्योहार के साथ कोई न कोई पौराणिक कहानी जुड़ी हुई है। आप अगर किसी व्रत या त्योहार को मनाते हैं, तो इसकी कहानी सुने बिना आपके व्रत का महत्व पूरा नहीं हो पाता। उत्पन्ना एकादशी की शुरुआत से भी ऐसी ही कहानी जुड़ी हुई है। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को उत्पन्ना एकादशी का व्रत पूरे विधि विधान से किया जाता है। इस बार यह तिथि 22 नवंबर दिन शुक्रवार को है। 

 

क्या है इसका महत्व 
पुराणों के अनुसार, एकादशी एक देवी है, जिनका जन्म भगवान विष्णु के अंशा से हुआ था। मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को देवी एकादशी प्रकट हुई थीं इसलिए इस एकादशी का नाम उत्पन्ना एकादशी हुआ। पद्मपुराण के अनुसार इस एकादशी के व्रत से धन-धान्य का लाभ और मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

 

क्या है इसकी शुरुआत की पौराणिक कहानी
पौराणिक कहानी के अनुसार, भगवान विष्णुर और मुर नामक राक्षस का युद्ध चल रहा था। राक्षस से युद्ध करते-करते भगवान विष्णु थक गए थे, इसलिए वह बद्रीकाश्रम में गुफा में जाकर विश्राम करने चले लगे। मुर राक्षस भगवान विष्णु का पीछा करता हुए बद्रीकाश्रम पहुंच गया था। गुफा में भगवान विष्णु को निद्रा लग गई। निद्रा में लीन भगवान को मुर ने मारना चाहा तभी विष्णु भगवान के शरीर से एक देवी प्रकट‍ हुईं और उन्हों ने मुर नामक राक्षस का तुरंत वध कर दिया। देवी के कार्य से विष्णु भगवान बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने कहा कि देवी आपका जन्म कृष्ण पक्ष की एकादशी को हुआ है इसलिए आपका नाम एकादशी होगा। सभी व्रतों में तुम्हारा व्रत श्रेष्ठ होगा। आज से हर एकादशी को मेरे साथ तुम्हारी भी पूजा होगी। जो भक्त एकादशी का व्रत रखेगा वह पापों से मुक्त हो जाएगा। 

 

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उत्पन्ना एकादशी व्रत पूजन विधि
उत्पन्ना एकादशी का व्रत रखने वालों को व्रत से पहले वाली रात यानी दशमी की रात में भोजन नहीं करना चाहिए। एकादशी के दिन ब्रह्मवेला में ही उठकर सुबह उठकर व्रत का संकल्पे करना चाहिए और फिर स्नाएन करना चाहिए। इसके भगवान को पुष्प, अक्षत और दीप, नैवेद्य आदि सोलह सामग्री से विधि विधान के साथ पूजा करके भगवान कृष्ण की आरती करनी चाहिए। इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है।

 

इस दिन इन कार्यों को करने से बचें 
पुराणों में यह भी बताया गया है कि जितना पुण्य कन्यादान, हजारों वर्षों की तपस्या और उससे अधिक पुण्य एकमात्र उत्पन्ना एकादशी व्रत करने से मिलता है। पुराणों के अनुसार, जो व्रत करता है और उसके घरवाले एकादशी के दिन सदाचार का पालन करना चाहिए और चावल नहीं खाने चाहिए। इस दिन भक्तों को परनिंदा छल-कपट, लालच, काम भाव, भोग विलास और द्वेष की भावनाओं से दूर रहना चाहिए। व्रत के दौरान कांसे के बर्तन में भोजन नहीं करना चाहिए।

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