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जन्माष्टमी से दो दिन पहले बलराम जी के जन्मोत्सव पर रखा जाता है यह व्रत, संतान की लंबी आयु का व्रत है ललही छठ व्रत

 बलराम जी का जन्मोत्सव

हर युग में किसी भी प्रकार के लाभ के लिए झूठ बोलना महापाप माना गया है। हलषष्ठी की कथा इसी बात का संकेत करती है। इस वर्ष यह व्रत शनिवार यानी 1 सितंबर को है। पूर्वांचल में (उत्तर प्रदेश, बिहार) इसे ललही छठ के नाम से भी जाना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के ठीक दो दिन पूर्व भाद्रपद कृष्ण पक्ष की षष्ठी को उनके बड़े भाई शेषनाग के अवतार बलराम जी का जन्मोत्सव मनाया जाता है। मथुरा मंडल और भारत के समस्त बलदेव मंदिरों में ब्रज के राजा बलराम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनता है।.

बलराम का सबसे प्रमुख अस्त्र हल और मूसल हैं। हल कृषि प्रधान भारत का प्रतीक है। इस दिन माताएं संतान की लंबी उम्र की कामना को लेकर व्रत रखती हैं। महुआ की दातुन की जाती है। इस दिन गाय के दूध, दही और घी का उपयोग नहीं होता। इस दिन ग्रामीण अंचल के घरों के आंगन में तालाब बनाकर, उसमें झरबेरी, पलाश और कांसी के पेड़ लगाते हैं। इस तालाब के चारों ओर आसपास की महिलाएं विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर हल षष्ठी की कथा सुनती हैं। इस दिन महिलाएं हल द्वारा जोते-बोए हुए जमीन का अन्न ग्रहण नहीं करतीं। व्रती माताएं केवल भैंस के दूध, दही और घी का ही इस दिन प्रयोग करती हैं। इस व्रत की पूजा हेतु भैंस के गोबर से पूजा घर में दीवार पर हर छठ माता का चित्र बनाया जाता है। गणेश और माता गौरा की पूजा की जाती है। 

परिवार में सुख-समृद्धि और खुशहाली लाता है यह व्रत

इस व्रत को लेकर एक कथा प्रचलित है। एक ग्वालिन गर्भवती थी। उसका प्रसवकाल नजदीक था, लेकिन दूध-दही खराब न हो जाए, इसलिए वह उसको बेचने चल दी। कुछ दूर पहुंचने पर ही उसे प्रसव पीड़ा हुई और उसने झरबेरी की ओट में एक बच्चे को जन्म दिया। उस दिन हल षष्ठी थी। थोड़ी देर विश्राम करने के बाद वह बच्चे को वहीं छोड़ दूध-दही बेचने चली गई। गाय-भैंस के मिश्रित दूध को केवल भैंस का दूध बताकर उसने गांव वालों ठग लिया। इससे व्रत करने वालों का व्रत भंग हो गया। इस पाप के कारण झरबेरी के नीचे स्थित पड़े उसके बच्चे को किसान का हल लग गया। दुखी किसान ने झरबेरी के कांटों से ही बच्चे के चिरे हुए पेट में टांकें लगाए और चला गया। 

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ग्वालिन लौटी तो बच्चे की ऐसी दशा देख कर उसे अपना पाप याद आ गया। उसने तत्काल प्रायश्चित किया और गांव में घूम कर अपनी ठगी की बात और उसके कारण खुद को मिली सजा के बारे में सबको बताया। उसके सच बोलने पर सभी ग्रामीण महिलाओं ने उसे क्षमा किया और आशीर्वाद दिया। इस प्रकार ग्वालिन जब लौट कर खेत के पास आई तो उसने देखा कि उसका मृत पुत्र तो खेल रहा था।

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  • Web Title:Two days before Janmashtami janm of Balram Hal Sashti Vrat is for long life of the child harchhatha or Lalhi Chhath read vrat katha