Today is Baikuntha Chaturdashi opens the way to heaven - आज है बैकुंठ चतुर्दशी, खुल जाते हैं स्वर्ग के रास्ते DA Image
12 नबम्बर, 2019|6:14|IST

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आज है बैकुंठ चतुर्दशी, खुल जाते हैं स्वर्ग के रास्ते

lord vishnu

बैकुंठ चतुर्दशी के दिन शरीर त्यागने वाले को स्वर्ग के दरवाजे खुले मिलते हैं। देवोत्थानी एकादशी पर भगवान विष्णु जागते हैं। श्रीहरि अपने आराध्य शिव की भक्ति में लीन हो जाते हैं। बैकुंठ चतुर्दशी को जो व्यक्ति भगवान विष्णु को एक हजार कमल के फूल चढ़ाता है। उसे बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है। बैकुंठ चतुर्दशी सोमवार को पड़ रही है।

बैकुंठ चतुर्दशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार यह पर्व भगवान शिव और भगवान विष्णु के एकाकार स्वरूप को समर्पित है। ज्योतिषाचार्य पं. पवन तिवारी का कहना है किदेवप्रबोधिनी एकादशी पर भगवान विष्णु चार माह की नींद से जागते हैं। चतुर्दशी पर शिव की पूजा करते हैं। ऐसा वरदान स्वयं श्रीहरि ने नारदजी के माध्यम से मानव जीवन को दिया था।

ऐसे करें पूजन : इस दिन नदी, सरोवर में स्नान के बाद नदी या तालाब के किनारे 14 दीपक जलाएं। इसके बाद भगवान विष्णु और शिव की आराधना करें। अगर संभव हो तो शिव और विष्णुजी को कमल पुष्प अर्पित करें। विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें।

सतयुग की कथा प्रचलित सतयुग की एक कथा बैकुंठ एकादशी से जुड़ी है। भगवान विष्णु को भक्ति से प्रसन्न कर राजा बलि उन्हें अपने साथ पाताल ले गए। उस दिन आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी थी। चार माह तक बैकुंठ लोक श्रीहरि के बिना सूना रहा और सृष्टि का संतुलन गड़बड़ाने लगा। तब मां लक्ष्मी विष्णुजी को वापस बैकुंठ लाने के लिए पाताल गईं। राजा बलि को भगवान विष्णु ने वरदान दिया कि वह हर साल चार माह के लिए उनके पास पाताल में रहने आएंगे। मां लक्ष्मी के साथ भगवान विष्णु बैकुंठ धाम वापस लौटे, उस दिन कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि थी।

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