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31 अक्तूबर, 2020|8:04|IST

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शरद पूर्णिमा पर बन रहे है ये खास योग, जानिए शुभ मुहूर्त

शरद पूर्णिमा का उत्सव 31 अक्टूबर यानी शनिवार को मनाया जाएगा। शरद पूर्णिमा पौराणिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण पर्व है। वर्षा बीत जाती है। प्रकृति सुंदर हो जाती है और इस दिन से शरद ऋतु का आरंभ होता है। हल्की सर्दी आने का आभास दिलाती है। शरद पूर्णिमा को उत्सव के रूप में मनाने की परंपरा हिंदू समाज में चली आ रही है। 

शरद पूर्णिमा मनाने का विधान :
शरद पूर्णिमा के दिन शुभ मुहूर्त में मां लक्ष्मी जी का पूजन करना चाहिए क्योंकि शरद पूर्णिमा को महालक्ष्मी और भगवान विष्णु का विशेष दिवस माना जाता है। प्रात:काल शीघ्र उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर यथोचित मुहूर्त में लक्ष्मी जी का पूजन करें। चौकी पर लाल रंग का कपड़ा बिछाकर उसके ऊपर मां लक्ष्मी की मूर्ति रखें। दाहिने हाथ की ओर दीपक जलाएं और बाएं हाथ पर जल का कलश रखें। प्रसाद के रूप में शुद्ध दूध की खीर बनाने का महत्व है। वैसे तो खीर शाम के समय बनाई जाती है जो चंद्रमा की किरणों में रखी जाती है और प्रात: काल उसका सेवन  किया जाता है। कहते हैं कि इस दिन चंद्रमा की किरणों में अमृत रस बरसता है, इसलिए शाम को खीर बनाकर छत पर जाल से ढक करके दो-तीन घंटे या पूरी रात रखना चाहिए। यह खीर आरोग्य देने वाली और स्वास्थ्य को पुष्ट करने वाली होती है। धूप-दीप, लाल पुष्प,अक्षत चंदन आदि से मां लक्ष्मी जी का आह्वान करें। खीर या  सफेद मिष्ठान्न का भोग लगाएं और इस मंत्र का उच्चारण करें।

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता! 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः!!

इसके पश्चात भगवान विष्णु जी के मंत्र का उच्चारण करें! 

मंगलम् भगवान विष्णु मंगलम् गरुडध्वज:! 
मंगलम पुंडरीकाक्षाय मंगलायस्तनो हरि:! 
 
इसके पश्चात मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान जी को भोग लगाएं। आरती करें तथा लक्ष्मी जी के किसी भी एक मंत्र का इस शुभ मुहूर्त में जाप करें। इस शुभ मुहूर्त में किया हुआ जाप कई गुना लाभ देता है। 

शरद पूर्णिमा में लक्ष्मी विष्णु पूजन के  शुभ मुहूर्त :
-प्रातः  7:50 बजे से  10:08 बजे तक  वृश्चिक लग्न 
-13:54 बजे से 15:22 बजे तक  मकर लग्न 
- 18:30 बजे से  20:19 बजे तक  कुंभ लग्न  

ये लग्न  स्थिर लग्न कहलाते हैं। स्थिर लग्न में लक्ष्मी जी का पूजन  बहुत शुभ रहता है। चौघड़िया के अच्छे मुहूर्त इस प्रकार हैं।

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 प्रातः 10:44 बजे से 13:26 बजे तक शुभ, अमृत और चर के चौघड़िया लक्ष्मी विष्णु पूजन के लिए बहुत शुभ हैं। शाम को 16:12 बजे से 17:34 बजे तक लाभ के चौघड़िया अति उत्तम मुहूर्त हैं। शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं से सुशोभित होते हैं। इस बार भी वह सुपरमून के रूप में दिखाई देंगे। शरद पूर्णिमा के चंद्रमा के दर्शन करने से मन संबंधी परेशानियां दूर जाती हैं। मन प्रसन्न रहता है। इस दिन आप चंद्र का स्टोन मोती चंद्रमणि आदि धारण कर सकते हैं। इस रात्रि को गाय के दूध से बनाई गई खीर चंद्रमा के प्रकाश में रखकर अगले दिन प्रातः काल खाने से शरीर पुष्ट हो जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन की कुछ लोग कार्तिक कार्तिक स्नान आरंभ कर देते हैं। वह शुभ मुहूर्त भी शरद पूर्णिमा को ही है।  इस दिन महिलाएं घर की सुख-शांति के लिए कार्तिक मास का स्नान आरंभ करती हैं जो प्रातःतारों की छांव में किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि कार्तिक स्नान करने से घर में समृद्धि बढ़ती हैऔर सुख-शांति रहती है।
(ये जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।) 

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