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4 मार्च, 2021|2:55|IST

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सक्सेस मंत्र : दूसरों की बातों में आकर अपना काम रोकना समझदारी नहीं

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कुछ लोग अपना काम करने में दूसरों की राय को कुछ ज्यादा ही अहमियत देते हैं। यहां तक कि दूसरों के कहने पर वह अपना काम ही छोड़ देते हैं। यह कहानी भी कुछ ऐसे ही है। यह कहानी एक मकड़ी की है, जो दूसरों की बातों में आकर अपना रास्ता भटक गई और परेशान हुई। 

एक घर में मकड़ी रहती थी। एक दिन उसने सोचा कि एक आलिशान जाला बनाया जाए और उसमें बैठकर आराम से कीड़े और मक्खियां खाएगी। जाला बनाने के लिए पूरे घर का मुआयना किया और एक कमरे में कोने की जगह चुन ली। इसके साथ ही मकड़ी जाला बनाने में जुट गई। कुछ देर बाद आधा जाला बुन कर तैयार हो गया। यह देखकर वह मकड़ी काफी खुश हुई कि तभी अचानक उसकी नजर एक बिल्ली पर पड़ी जो उसे देखकर हंस रही थी।

मकड़ी को गुस्सा आ गया और वह बिल्ली से बोली, हंस क्यो रही हो? हंसू नहीं तो क्या करूं?!, बिल्ली ने जवाब दिया, यहां मक्खियां नहीं हैं ये जगह तो बिलकुल साफ सुथरी है, यहां कौन आएगा तेरे जाले में?

ये बात मकड़ी को समझ में आ गई। उसने अच्छी सलाह के लिए बिल्ली को धन्यवाद दिया और जाला अधूरा छोड़कर दूसरी जगह तलाश करने लगी। उसने इधर-ऊधर देखा। उसे एक खिड़की नजर आई और फिर उसमें जाला बुनना शुरू किया कुछ देर तक वह जाला बुनती रही, तभी एक चिड़िया आई और मकड़ी का मजाक उड़ाते हुए बोली, अरे मकड़ी, तू भी कितनी बेवकूफ है।

क्यों? मकड़ी ने पूछा!

चिड़िया उसे समझाने लगी, अरे यहां तो खिड़की से तेज हवा आती है। यहां तो तू अपने जाले के साथ ही उड़ जाएगी।

मकड़ी को चिड़िया की बात ठीक लगी और वह वहां भी जाला अधूरा बना छोड़कर सोचने लगी अब कहां जाला बनाया जाए। समय काफी बीत चूका था और अब उसे भूख भी लगने लगी थी। अब उसे एक अलमारी का खुला दरवाजा दिखा और उसने उसी में अपना जाला बुनना शुरू कर दिया। थोड़ सा जाला बुना ही था तभी उसे एक काकरोच नजर आया जो जाले को अचरज भरी नजरों से देख रहा था।

मकड़ी ने पूछा, इस तरह क्यो देख रहे हो?

काकरोच बोला- अरे यहां कहां जाला बुनने चली आई, ये तो बेकार की आलमारी है। अभी ये यहाँ पड़ी है कुछ दिनों बाद इसे बेच दिया जाएगा और तुम्हारी सारी मेहनत बेकार चली जाएगी। यह सुन कर मकड़ी ने वहां से हट जाना ही बेहतर समझा।

बार-बार प्रयास करने से वह काफी थक चुकी थी और उसके अंदर जाला बुनने की ताकत ही नहीं बची थी। भूख की वजह से वह परेशान थी। उसे पछतावा हो रहा था कि अगर पहले ही जाला बुन लेती तो अच्छा रहता। पर अब वह कुछ नहीं कर सकती थी उसी हालत में पड़ी रही।

जब मकड़ी को लगा कि अब कुछ नहीं हो सकता है तो उसने पास से गुजर रही चींटी से मदद करने का आग्रह किया।

चींटी बोली, मैं बहुत देर से तुम्हें देख रही थी, तुम बार-बार अपना काम शुरू करती और दूसरों के कहने पर उसे अधूरा छोड़ देती। जो लोग ऐसा करते हैं, उनकी हालत ऐसी ही होती है। ऐसा कहते हुए वह अपने रास्ते चली गई और मकड़ी पछताती हुई निढाल पड़ी रही।

इस कहानी से हम यह सीख सकते हैं

  • दूसरों की राय लेने में कोई बुराई नहीं होती है। मगर उसपर बिना अपना दिगाग लगाए अमल करना बुद्धिमानी नहीं है।
  • अपना काम किसी और के विचार से करने में काफी जोखिम होता है। अपनी परिस्थितियों को केवल हम ही समझ सकते हैं, कोई और नहीं। 
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