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धक्का लगने पर ही छलकती है सच्चाई

एक बार गुरु जी ने अपने शिष्यों को ज्ञान देने के उद्देश्य से एक प्रश्न पूछा। उन्होंने शिष्यों से कहा, मान लीजिए कि आप दूध का गिलास हाथ में लिए खड़े हैं। इसी दौरान अचानक कोई आपको धक्का दे देता है, तो क्या होगा?

शिष्य बोला कि गिलास में से दूध छलक जाएगा। गुरु जी ने पूछा कि दूध क्यों छलका? तो एक शिष्य बोला, क्योंकि किसी ने धक्का दिया। इसके चलते गिलास में दूध छलक गया। 

यह सुनकर गुरु जी ने शिष्य के उत्तर को गलत बता दिया, उन्होंने फिर से प्रश्न दोहराया कि दूध क्यों छलका। इस बार सभी शिष्य एक-दूसरे का मुंह देखने लगे।

यह देख गुरु जी ने कहा कि सही उत्तर ये है कि आपके गिलास में दूध था, इसलिए दूध छलका। क्योंकि जो आपके पास है वही छलकेगा। गुरु जी ने विस्तार पूर्वक समझाते हुए कहा कि इसी तरह जीवन में जब हमें धक्के लगते हैं तो व्यवहार से हमारी वास्तविकता ही छलकती है।

हमारे पास जो होता है, वही छलकता है जैसे धैर्य, मौन, कृतज्ञता, स्वाभिमान, निश्चिंतता, मानवता, गरिमा.. या फिर क्रोध, कड़वाहट, पागलपन, ईर्ष्या, द्वेष, घृणा आदि।

शिक्षा: आप का सच उस समय तक सामने नहीं आता, जब तक आपको धक्का न लगे, तो देखना ये है कि जब आप को धक्का लगा तो क्या छलका?

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  • Web Title:The truth sprouts when a push starts