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अनुभूति है ईश्वर को जानने का माध्यम

surya dev

इंद्रियों के माध्यम से जगत को देखा जा सकता है, उसका अनुभव किया जा सकता है, लेकिन ईश्वर को देखने के लिए गहन अनुभूति चाहिए। ईश्वर की उपस्थिति को इंद्रिय के माध्यम से नहीं, भावना के माध्यम से महसूस किया जा सकता है। अनुभूति है ईश्वर को जानने का माध्यम

जीवन के पांच आयाम हैं या पांच इंद्रियां हैं- दृष्टि, ध्वनि, गंध, स्वाद और स्पर्श। लेकिन यहां एक और पहलू है, जिसकी गणना हम नहीं करते। वह है भावना; ईश्वर की उपस्थिति की अनुभूति। प्रकाश को आंखों के माध्यम से नहीं सुना जा सकता, उसे आंखों से ही देखा जा सकता है। ध्वनि को आंखों द्वारा नहीं देखा जा सकता, बल्कि कानों से सुना जा सकता है। इसी तरह ईश्वर की उपस्थिति को दिल के द्वारा ही महसूस किया जा सकता है।.

भगवान इंद्रियों की विषय-वस्तु नहीं, बल्कि भावनाओं की भावना हैं। उपस्थिति की उपस्थिति, चुप्पी की आवाज हैं। जीवन के प्रकाश, दुनिया का सार और परमानंद के स्वाद हैं। और हम मानव जीवन को समृद्ध तभी कह सकते हैं,जब हम इस अस्तित्व की छठी इंद्रिय भावना में रहें।.

जब तुम अवसादग्रस्त रहते हो, तो यह जान लो कि तुम अपने चारों ओर अवसाद के कण पैदा कर रहे हो। तुम्हारे चारों तरफ फैले अवसाद के आवेश कण पर्यावरण से चिपक जाते हैं। हम एक बहुत ही सूक्ष्म रूप से अपनी नकारात्मक भावनाओं के माध्यम से वातावरण को गंदा कर रहे हैं। मुझे लगता है कि भविष्य में एक नियम होगा: जो भी उदास होता है, उसे जुर्माना देना पड़ेगा! फिर आपको कहा जाएगा- जाओ प्राणायाम करो, ध्यान करो और बिना किसी गोली को खाए अपने अवसाद से छुटकारा पाओ। दुखी होने के लिए यहां क्या है? वैसे भी तुम कुछ ही वर्षों के लिए यहां पर हो, तुम इस ग्रह पर कुछ ही साल रहोगे। और जब तक तुम यहां हो, अच्छा होगा कि तुम उसे खुशी-खुशी बिताओ।.

तुमको इस जीवन से बहुत अधिक मिल सकता है। यह तुम तब देख पाओगे, जब तुम कुछ समय अपने लिए निकाल कर आत्मा को तरोताजा करोगे। तुम्हारी आत्मा तुमसे एक मुस्कान पाने के लिए भूखी है। यदि तुम इसे दे सकते हो, तो तुम पूरे साल ऊर्जा से भरे रहोगे और कोई भी तुम्हारी मुस्कान नहीं छीन पाएगा।.

प्रत्येक व्यक्ति जीवन में सफल होना चाहता है, लेकिन वह जानता भी नहीं कि सफलता क्या है? सफलता के लक्षण क्या हैं? क्या केवल बहुत सारा पैसा होना सफलता है? तुम्हें ऐसा क्यों लगता है कि पैसा होना ही सफल होना है? ऐसा इसलिए, क्योंकि पैसा, जो कुछ आप करना चाहते हो, आपको उसे करने की आजादी देता है। तुम्हारे पास एक बड़ा बैंक बैलेंस होने के बावजूद आपको बीमारियां हो सकती हैं। हम धन पाने के लिए अपना आधा स्वास्थ्य खर्च कर देते हैं और फिर वापस स्वास्थ्य पाने के लिये आधा धन खर्च कर देते हैं। यह कैसी विडंबना है? क्या यह सफलता है? यह अच्छा गणित नहीं है।.

उन सभी को देखो, जो सफल होने का दावा करते हैं। क्या वे सफल हैं? नहीं, वे दुखी हैं। फिर, सफलता की निशानी क्या है? सफलता की निशानी आनंद में डूबे रहना है। है ना! वह है विश्वास, करुणा, उदारता और एक ऐसी मुस्कान, जो कोई भी तुमसे छीन न सके, सच्चे दिल से प्रसन्न रहना और खुद को और अधिक मुक्त रखने के लिए सक्षम होना- ये एक सफल व्यक्ति के लक्षण हैं।.

कुछ समय निकालकर स्वयं में थोड़ी गहराई से झांक कर देखो और मन को शांत करो। इस प्रकार अपने मन से अपनी सभी पुरानी छापों को मिटा कर हम दिव्य उपस्थिति का अनुभव कर सकते हैं, उस परमात्मा का अनुभव कर सकते हैं, जो हमारे अस्तित्व के केंद्र में निहित है। यही उपस्थिति की अनुभूति करना है।

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  • Web Title:The sensation is the means of knowing God
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