The effect of weather change is now seen in thakurji or lord vishnu dress as well see the clothing and food options available in markets - मौसम बदलते ही ठाकुरजी को लगी ठंड, खानपान के साथ पोशाक में भी दिखा बदलाव DA Image
5 दिसंबर, 2019|10:59|IST

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मौसम बदलते ही ठाकुरजी को लगी ठंड, खानपान के साथ पोशाक में भी दिखा बदलाव

vishnu ji winter dress

सर्दी का सीजन शुरू होते ही मंदिरों में ठाकुरजी के खानपान एवं पोशाक में बदलाव किया जाएगा यह क्रम सोमवार को छठ से शुरू हो जाएगा। बाजारों में भी ठाकुरजी की गर्म पोशाकों की बिक्री प्रारंभ हो गयी है। घरों में भी लड्डू गोपाल को रजाई उढ़ाना भक्तों ने शुरू कर दिया है।

भारत विख्यात द्वारिकाधीश मंदिर में ठाकुरजी को सर्दी न लगे इसके लिए रूई की बंडी (जैकेट) धारण कराई जा रही है। रात्रि में ठाकुरजी की रजाई उढ़ाने का क्रम शुरु हो गया। मंदिर जगमोहन में सर्दी का असर कम करने के लिए रूई के पर्दे लगवाए गए हैं। मंदिर के विधि सलाहकार राकेश तिवारी एडवोकेट ने बताया कि ठाकुरजी के खानपान में अभी बदलाव नहीं किया गया है। सर्दी बढ़ने पर यह बदलाव किया जाएगा।

इसी तरह वैष्णव संप्रदाय के ठाकुर मदनमोहन जी मंदिर, दाऊजी मंदिर, श्रीनाथजी मंदिर में भी ठाकुरजी को गर्म वस्त्र धारण कराए जा रहे हैं। वृंदावन के ठाकुर राधा वल्लभ मंदिर के सेवायत मोहित मराल गोस्वामी ने बताया कि सोमवार से ठाकुर जी का हिम रितु का श्रंगार किया जाएगा, जिसमें ठाकुरजी को सनील एवं ऊनी वस्त्रों से बनी पोशाक एवं कपड़ों से बने फूलों की माला धारण कराई जाएंगी तथा रात्रि में शयन के दौरान टोपा दस्ताने दुशाला और रजाई का प्रयोग किया जाएगा। साथ ही ठाकुर जी के प्रसाद में मेवा एवं केसर का प्रयोग किया जाएगा।

वहीं ठाकुर बांके बिहारी मंदिर के सेवायत अतुल कृष्ण गोस्वामी ने बताया कि सर्दी बढ़ने के साथ ही ठाकुर जी को ऊनी वस्त्र धारण कराए जाते हैं, क्योंकि हमारे यहां ठाकुर जी के बाल भाव की सेवा है। सर्दी बढ़ते ही उन्हें सर्दी से बचाने की तैयारी शुरू कर दी जाती हैं ज्यादा सर्दी बढ़ने पर ठाकुर जी के समक्ष अंगीठी का प्रयोग भी किया जाता है।

मंदिर सेवायत अशोक गोस्वामी ने बताया कि मंदिर में ठाकुर जी को ऊनी कपड़ों एवं सनील की पोशाक धारण कराई जाएंगी साथ ही रात्रि में शयन के दौरान रजाई टोपा और दुशाला धारण कराए जाएंगे, वहीं ठाकुर जी के प्रसाद में मेवा और केसर का प्रयोग होगा। रात्रि में शयन के समय ठाकुर जी को केसर युक्त दूध का प्रसाद भी लगाया जाएगा, वहीं ठाकुर जी की सेवा में केसर और हिना के इत्र का प्रयोग होगा।
 

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