DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

संगत का असर

एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी कीड़े से थी। दोनों की मित्रता काफी अच्छे से चल रही थी। एक दिन कीड़े ने भंवरे को दावत पर आमंत्रित किया। कीड़े प्रेमपूर्ण आमंत्रण पर भंवरा मना न कर सका और हामी भर दी। भंवरा जब कीड़े के यहां भोजन खाने पहुंचा तो लेकिन गोबर की बदबू और गंदगी से उसका हाल बुरा हो गया। हालांकि मित्र के प्रेम के आगे वह कुछ बोल न सका लेकिन भंवरा सोच में पड़ गया। उसने बुरे का संग किया, इसलिये उसे गोबर खाना पड़ गया।

भंवरा जब वहां से विदा हुआ तो उसने भी कीड़े को अपने यहां दावत पर आमंत्रित किया। अगले दिन कीड़ा भी भंवरे के यहां दावत पर पहुंचा। भंवरे ने कीड़े को उठाकर गुलाब के फूल में बैठा दिया, कीड़े ने स्वादिस्ट पराग रस पिया। अभी वह अपने मित्र का धन्यवाद कर ही रहा था कि पास के मंदिर का पुजारी उसी गुलाव के फूल को तोड़कर ले गया और बिहारी जी के चरणों में चढा दिया। कीड़े को ठाकुर जी के दर्शन हुए और भगवान के चरणों में बैठने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

शाम को पुजारी ने सारे फूल इकट्ठा किए और गंगा जी में छोड़ दिए। कीड़ा अपने भाग्य पर हैरान था, इतने में भंवरा उड़ता हुआ कीड़े के पास आया, मित्र का हाल पूछा? कीड़े ने बहुत खुश होते हुए कहा कहा-भाई, जन्म-जन्म के पापों से मुक्ति मिल गई।

शिक्षा : ये सब अच्छी संगत का फल है।
संगत से गुण ऊपजे, संगत से गुण जाए
लोहा लगा जहाज में, पानी में उतराय!

 

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:The effect of compatible