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18 जनवरी, 2020|9:09|IST

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गुजरात और केरल के मंदिरों ने शुरू की बेहतर कल की पहल

tirumala temple initiative

मंदिर को एक ऐसी सामाजिक संस्था माना जाता रहा है, जहां आकर लोग हमेशा प्रेरणा लेते हैं। धर्मस्थल समाज में संदेश पहुंचाने के प्रभावी माध्यम भी हैं। देश के दो राज्यों के दो मंदिरों ने समाज को नई दिशा दी है। गुजरात के एक मंदिर ने बिजली खर्च को देखकर सौर ऊर्जा प्रणाली को अपनाया। इससे प्रति माह लाखों रुपये बचाते हुए राशि को शिक्षा सुधार में खर्च कर रहा है। वहीं, केरल का एक मंदिर अपने परिसर में वर्षा जल का संचय करते हुए करीब 100 घरों में जलापूर्ति कर रहा है। 

सूरत : मंदिर ने सौर ऊर्जा से हर माह डेढ़ लाख बचाए :
बिजली उपभोग को बचाने के लिए सूरत जिले में बद्रीनारायण मंदिर प्रबंधन ने सौर ऊर्जा प्रणाली को अपनाया। मंदिर के ट्रस्टी प्रवीण चंद्रा ने बताया कि बिजली खर्च लगातार बढ़ रहा था। इसके लिए सौर ऊर्जा का उपयोग ज्यादा बेहतर लगा। 25 लाख रुपये खर्च करके मंदिर की छत पर 50 किलोवाट क्षमता के सौर पैनल लगाए गए हैं। 

चंद्रा ने बताया कि सौर ऊर्जा के इस्तेमाल से डेढ़ से दो लाख रुपये प्रति माह का बिल घटकर 10 से 12 हजार रुपये पर आ गया। इस तरह प्रबंधन को करीब एक से डेढ़ लाख की बचत होने लगी है। मंदिर प्रबंधन ने इस राशि से क्षेत्र में एक संस्कृत विद्यालय और एक महाविद्यालय की स्थापना की है। 


तिरुमाला मंदिर में संचित वर्षा जल से 100 घरों में जलापूर्ति :
केरल के तिरुमाला देवास्वम मंदिर 2004 से ही मंदिर परिसर में वर्षा जल संचयन कर रहा है। इतना ही नहीं इसके जरिये आसपास के 100 घरों में जलापूर्ति भी की जा रही है। मंदिर के प्रबंधक पी. रंगदासा प्रभु ने कहा, हर बार बारिश के दौरान मंदिर में जलभराव का सामना करना पड़ता था। इसलिए हमने मंदिर की टंकी में बारिश का पानी जमा करने के बारे में सोचा। उन्होंने कहा कि इलाके में 100 से अधिक घरों में मंदिर की टंकी से पानी का उपयोग किया जाता है।


प्रबंधक ने कहा, हम लगभग 14,000 वर्ग फुट पानी का भंडारण कर रहे हैं। हर कोई पानी पाने के लिए बोरवेल खोदता है, इसलिए हमने वर्षा जल संचयन और लोगों को संदेश देने की सोची। उन्होंने कहा, मैं अपने घर में भी वर्षा जल संचयन का प्रयास करता हूं। 

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  • Web Title:Temples of Gujarat and Kerala start initiatives for better tomorrow by environment friendly initiatives