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28 मार्च, 2020|2:27|IST

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स्वास्तिक में श्रीगणेश की बनती है छवि, जानें क्या है इस चिह्न का वास्तविक अर्थ और महत्व

swastik

हिंदू धर्म में चिन्हों और प्रतीकों का बहुत महत्व है। मंगल कार्यों के लिए स्वास्तिक बनाने का भी विशेष महत्व है। कथा, पूजा, हवन, शादी, यज्ञ आदि धार्मिक त्योहारों में स्वास्तिक बनाए जाते हैं। ऐसे में क्या आप जानते हैं कि स्वास्तिक का अर्थ और इसका महत्व क्या है? आइए, जानते हैं- 

क्या है स्वास्तिक का अर्थ और महत्व 
स्वास्तिक शब्द मूलभूत 'सु+अस' धातु से बना है। 'सु' का अर्थ कल्याणकारी एवं मंगलमय है,' अस 'का अर्थ है अस्तित्व एवं सत्ता। इस प्रकार स्वास्तिक का अर्थ हुआ ऐसा अस्तित्व, जो शुभ भावना से भरा और कल्याणकारी हो। जहाँ अशुभता, अमंगल एवं अनिष्ट का लेश मात्र भय न हो। साथ ही सत्ता, जहाँ केवल कल्याण एवं मंगल की भावना ही निहित हो  और सभी के लिए शुभ भावना सन्निहित हो इसलिए स्वास्तिक को कल्याण की सत्ता और उसके प्रतीक के रूप में निरूपित किया जाता है।

 

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बनती है श्रीगणेश की छवि 
विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की प्रतिमा की भी स्वास्तिक चिन्ह से संगति है। श्री गणेश जी के सूँड़, हाथ, पैर, सिर आदि अंग इस तरह से चित्रित होते हैं कि यह स्वास्तिक की चार भुजाओं के रूप में प्रतीत होते हैं।‘ॐ’ को भी स्वास्तिक का प्रतीक माना जाता है।‘ॐ’ ही सृष्टि के सृजन का मूल है, इसमें शक्ति, सामर्थ्य एवं प्राण सन्निहित हैं।ईश्वर के नामों में सर्वोपरि मान्यता इसी अक्षर की है।अतः स्वास्तिक ऐसा प्रतीक है, जो सर्वोपरि भी है और शुभ एवं मंगलदायक भी है।
 

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  • Web Title:swastik real meaning and significance know its connection with lord ganesh