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14 मार्च तक सूर्य-शनि का संयोग शुभ या अशुभ? जानें नकारात्मक प्रभाव से बचने के ज्योतिषीय उपाय

Surya-Shani Yuti In Aquarius Horoscope : ग्रहों के राजा 14 मार्च तक शनि की राशि कुंभ में विराजमान रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली में सूर्य और शनि की युति को शुभ नहीं माना गया है।

14 मार्च तक सूर्य-शनि का संयोग शुभ या अशुभ? जानें नकारात्मक प्रभाव से बचने के ज्योतिषीय उपाय
Arti Tripathiलाइव हिन्दुस्तान,नई दिल्लीWed, 21 Feb 2024 06:04 AM
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Surya-Shani Yuti February 2024 : ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, न्याय और कर्म के देवता शनि 2024 में पूरे साल कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे। इस राशि में 13 फरवरी से ग्रहों के राजा सूर्य भी उपस्थित हैं और 14 मार्च तक इसी राशि में रहेंगे। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, सूर्य और शनि का रिश्ता पिता और पुत्र के समान है, लेकिन कुंडली में सूर्य और शनि की एक साथ आने पर जातक को जीवन में कई कष्टों का सामना करना पड़ सकता है। शनिदेव कर्मों के आधार पर लोगों को शुभ-अशुभ फल देते हैं। वहीं, सूर्यदेव ऊर्जा, आत्मविश्वास, उन्नति और सुख-समृद्धि का कारक माना गया है। आइए जानते हैं कि कुंडली में सूर्य-शनि की उपस्थिति का क्या प्रभाव होता है और शनि के प्रकोप से बचने के ज्योतिषीय उपाय...

सूर्य-शनि का संयोग के राशियों पर प्रभाव : ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, कुंभ राशि में सूर्य-शनि की युति से मेष,वृषभ, मिथुन,कन्या, तुला, धनु और मीन राशि वालों को लाभ होगा। वहीं,कर्क, सिंह,वृश्चिक,मकर और कुंभ राशि के जातकों को लाइफ में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

सूर्य-शनि की युति शुभ या अशुभ?

-सूर्य और शनि के पहले भाव में विराजमान होने से जातक के ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। लंबे समय से चली आ रही बीमारियों से छुटकारा मिलता है। हालांकि, कड़ी मेहनत का उतना फल नहीं मिलता है, जितना आप उम्मीद करते हैं। इस दौरान लव, हेल्थ, करियर और आर्थिक मामलों में बहुत सावधानी से फैसला लेना चाहिए।

-ज्योतिष के अनुसार, कुंडली में जब सूर्य-शनि दूसरे भाव में आते हैं, तब रिश्तों में कड़वाहट बढ़ने लगती है। आर्थिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और धन हानि के योग नबते हैं। इस दौरान सूर्यदेव की उपासना करने से अशुभ प्रकोप से राहत पाया जा सकता है।

-कुंडली में तीसरे भाव में सूर्य-शनि के युति को शुभ माना गया है। कहा जाता है कि इससे जीवन में पॉजिटिविटी बढ़ती है। धन-संपत्ति में वृद्धि के योग बनते हैं। निवेशों से अच्छा रिटर्न मिलता है। हालांकि, रिश्तों में तनाव की स्थिति बन सकती है।

-  किसी व्यक्ति की कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य और शनि का साथ आना अशुभ होता है। कहा जाता है कि इससे परिजनों से वैचारिक मतभेद होने की संभावनाएं बढ़ती हैं। जीवनसाथी के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। गृह-क्लेश की स्थिति बनी रहती है। इस दौरान बुद्धिमानी से फैसले लें। धार्मिक कार्यों में शामिल हों। इससे चुनौतियों का सामना करने में आसानी होगी।

- कुंडली के पांचवे भाव में सूर्य-शनि की युति होना उत्तम माना गया है। इस दौरान करियर से जुड़े बड़े फैसले ले सकते हैं। शैक्षिक कार्योों में चुनौतियों के बावजूद सफलता मिलती है। दान-पुण्य के कार्य लाभकारी साबित होंगे। हालांकि, संतान से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

- छठे भाव में  सूर्य-शनि के आने से काफी सुखद परिणाम मिलते हैं। प्रेम-संबंधों में मधुरता आती है। ऊर्जा और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। प्रेम-विवाह में सफलता हासिल होती है। जीवन की सभी परेशानियां दूर होती है, लेकिन मानसिक तनाव बढ़ सकता है। धन से जुड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

-सातवें भाव में सूर्य-शनि के विराजमान  होने से कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। व्यापार में हानि हो सकता है। घरेलू दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। शादी-विवाह देरी हो सकती है। स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव आ सकता है। इस दौरान जातक की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।

- कुंडली में आठवें भाव में सूर्य-शनि की युति जातक के जीवन में काफी उतार-चढ़ाव लाती है। इस दौरान जीवन में कई बड़े बदलाव आते हैं। करियर में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। आध्यात्मिक कार्यों में रुचि बढ़ती है।

-  नौवें भाव में सुर्य-शनि की युति से व्यक्ति के जीवन में कई बड़े महत्वपूर्ण बदलाव आते हैं। व्यक्तित्व में निखार आता है। इस दौरान हार-जीत की संभावनाएं समान होती हैं। जातक का शैक्षिक कार्यों में मन लगता है।

-  दशम भाव में सूर्य-शनि के युति से जातक के प्रोफेशनल लाइफ पर काफी प्रभाव पड़ता है। करियर से जुड़े फैसलों में कनफ्यूजन महसूस होती है। हालांकि, इस संयोग से कार्यों के सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। इस दौरान नए कार्यों की शुरुआत करना शुभ नहीं माना जाता है।

- एकादश भाव में सूर्य-शनि के आने से जीवन में कई चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना करना पड़ता है। मानसिक तनाव बढ़ता है। लोगों से मिलने-जुलने में रुचि कम होती है और माता के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इस दौरान स्वास्थ्य को लेकर बिल्कुल भी लापरवाही न बरतें।

- बारहवें भाव में सूर्य और शनि के संयोग से जातक के मन में आशा-निराशा के भाव आते हैं। मानसिक अशांति रह सकती है। इसकी युति से व्यक्ति को जीवन में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

सूर्य-शनि के अशुभ प्रकोप से बचने के ज्योतिषीय उपाय 

शनिवार के दिन शनिदेव की पूजा करें।
शनिवार के दिन काला तिल, सरसों तेल और उड़द दाल का दान करें।
इसके अलावा नियमित सूर्यदेव को जल अर्घ्य दें।
सूर्यदेव के बीज मंत्रों का जाप करें।
शनिवार के दिन हनुमानजी की पूजा करें और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

डिस्क्लेमर: इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य है और सटीक है। इन्हें अपनाने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।


 

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