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हिंदी न्यूज़ धर्मSurya grahan 2022: सूर्य ग्रहण का सूतक दिवाली के अगले दिन इस समय होगा शुरू, जानें सूतक काल में क्या करें 

Surya grahan 2022: सूर्य ग्रहण का सूतक दिवाली के अगले दिन इस समय होगा शुरू, जानें सूतक काल में क्या करें 

Surya grahan 2022 date :सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लग जाता है। अतः इस सूर्यग्रहण का सूतक 25 अक्टूबर को भोर में 4 बजकर 29 मिनट से आरम्भ हो जाएगा जो कि सूर्यग्रहण ग्रहण के समाप्त होने तक रहेगा।

Surya grahan 2022: सूर्य ग्रहण का सूतक दिवाली के अगले दिन इस समय होगा शुरू, जानें सूतक काल में क्या करें 
Anuradha Pandeyपं दिवाकर त्रिपाठी पूर्वांचली,नई दिल्लीSat, 22 Oct 2022 07:36 AM

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सूर्यग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले लग जाता है। अतः इस सूर्यग्रहण का सूतक 25 अक्टूबर को भोर में 4 बजकर 29 मिनट से आरम्भ हो जाएगा जो कि सूर्यग्रहण ग्रहण के समाप्त होने तक रहेगा। -सूर्यग्रहण की सम्पूर्ण अवधि 7 घंटा 5 मिनट है किन्तु काशी में सम्पूर्ण सूर्यग्रहण 40 मिनट का है> धर्मग्रंथों के अनुसार, सूतक के दौरान मूर्ति पूजा निषेध है। यही नहीं इस दौरान खाने-पीने की चीजों में तुलसी के पत्ते डालकर रखे जाते हैं।

भारत मे स्पष्ट रूप से खुली आँखों से दृश्य होने के कारण धर्मिक दृष्टि के साथ साथ ज्योतिषीय दृष्टि से भी महत्त्वपूर्ण है। ग्रहण काल मे ग्रहों की स्थिति के अनुसार मन का कारक ग्रह चद्रमा तुला राशि मे केतु और सूर्य के साथ रहेंगे । अतः चंद्रमा से प्रभावित होने वाले जातकों को विशेष सावधानी बरतनी होगी।
ग्रहण शुभ एवं अशुभ दोनों फल प्रदान करता है। अतः यह व्यक्ति पर निर्भर करता है कि आपने किस फल के अनुरूप कार्य किया है।
खण्ड सूर्य ग्रहण के सूतक काल में दान तथा जापादि का महत्व माना गया है। पवित्र नदियों अथवा सरोवरों में स्नान आदि के बाद मंत्रो का जप किया जाना श्रेष्ठ फल प्रदायक होता है तथा इस समय में मंत्र सिद्धि भी की जाती है। 
ग्रहण के सूतक तथा ग्रहण काल में व्यक्ति को अपनी इच्छापूर्ति के लिए स्नान, ध्यान, मन्त्र, स्तोत्र-पाठ, मंत्रसिद्धि, तीर्थस्नान, हवन-कीर्तन, दान इत्यादि कार्य करना चाहिए। ऐसा करने से सभी प्रकार के बाधाओं से निवृत्ति एवं सुख की प्राप्ति होती है।
तीर्थ स्नान, हवन तथा ध्यानादि शुभ काम इस समय में किए जाने पर मन प्रसन्न, शुभता प्रदान करने वाला तथा कल्याणकारी सिद्ध होते हैं। 
धर्म-कर्म से जुड़े लोगों को अपनी लग्न एवं राशि अनुसार अथवा किसी योग्य ब्राह्मण के परामर्श से दान की जाने वाली वस्तुओं को इकठ्ठा कर संकल्प के साथ उन वस्तुओं को योग्य व्यक्ति को दे देना चाहिए।