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सक्सेस मंत्र: छोटे-छोटे कदम एक बड़े उद्देश्य और असंभव उपलब्धियों तक ले जाते हैं

success mantra

हमारा अकसर अपने आसपास ऐसे लोगों से साबका पड़ता है, जो किसी न किसी तरह की शारीरिक अक्षमता से पीड़ित हैं। इसके समाधान के रूप में बाजार में कृत्रिम अंगों के जो विकल्प मौजूद हैं, वह या तो बहुत महंगे हैं या फिर सस्ते तो हैं, पर कम उपयोगी हैं। इससे शारीरिक अक्षमता से पीड़ित लोगों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। उन्हें कुछ ऐसा चाहिए जो किफायती होने के साथ-साथ बढ़िया गुणवत्ता का भी हो। लोगों की इस जरूरत को समझा विनय वी और नीलेश वाल्के ने। उन्होंने एक ऐसा कृत्रिम अंग बनाने में कामयाबी हासिल की है, जो बाजार के इस फर्क को दूर कर सकता है। उन्होंने अपने स्टार्टअप ‘ग्रैस्प बायोनिक्स' के जरिये ‘पूरक' नाम का कृत्रिम अंग बनाया है, जो भारत में हाथ की अक्षमता से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए राहत की बात हो सकती है।.

कैसे हुए प्रेरित
विनय वी और नीलेश वाल्के दोनों ने ही मैकेनिकल इंजीनियरिंग से बीटेक किया है। वे जब साल 2011 में बैंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस में डिजाइन से मास्टर डिग्री की पढ़ाई कर रहे थे, तब वर्कशॉप में उनकी मुलाकात एक हाथ से अक्षम कर्मचारी से हुई। उन्होंने देखा कि वह व्यक्ति बिना कृत्रिम अंग की मदद के सिर्फ एक हाथ से काम कर रहा है। उन्होंने उस कर्मचारी की परेशानी को समझा और पाया कि उस कर्मचारी की तरह हमारे देश में लाखों ऐसे लोग हैं, जिन्हें ऐसे कृत्रिम अंगों की जरूरत है, जो उन्हें बाजार में किफायती दामों में उपलब्ध हो सकें। 

दोनों ने मिल कर ऐसा उपकरण बनाने की योजना पर काम किया। हालांकि उन्हें अपनी पढ़ाई पूरी होने पर इस योजना को बीच में ही छोड़ना पड़ा। दोनों साथी अगले चार-पांच सालों तक बहुराष्ट्रीय कंपनियों की नौकरी में व्यस्त रहे। आखिर उन्हें अपने एक पूर्व शिक्षक की मदद से अपनी योजना को फिर से शुरू करने का मौका मिला। उन्हें वेल्कम ट्रस्ट ग्रांट के लिए चुना गया। आखिर कई प्रयोगों के बाद उनका उपकरण ‘पूरक' बन कर तैयार हुआ। उनके इस उपकरण की खास यांत्रिकी है, जो इसे इस्तेमाल करने वालों को पूरी पांचों उंगलियां इस्तेमाल करने में मदद करती है। यह उपकरण बिना विद्युत तरंगों के इस्तेमाल के लोगों को बेहतर नियंत्रण की सहूलियत देता है। इसी साल शुरू हुए उनके स्टार्टअप को कर्नाटक सरकार का साथ भी मिला। जल्दी ही उनका यह उपकरण लोगों के इस्तेमाल के लिए बाजार में उपलब्ध होगा।    

विनय वी और नीलेश वाल्के ने कहा- हम चाहते हैं कि किसी शारीरिक अक्षमता से जूझ रहा व्यक्ति दूसरों पर आश्रित हुए बिना अपनी जिंदगी आत्मविश्वास के साथ जी सके। हम इसी फर्क को पाटने में लगे हैं। 
 
काम की बात 
लक्ष्य ऐसा हो, जो खुद के अलावा दूसरे के जीवन को बेहतरी की दिशा में ले जाए। जब ऐसा होता है, तब लोग आपके लक्ष्य को पूरा करने में मदद करने लगते हैं।
 

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  • Web Title:success tips : how to decide aim in your life
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