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3 अक्तूबर, 2020|9:18|IST

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सक्सेस मंत्र: नई योजनाओं और विचारों को अपनाने से घबराएं नहीं

key of success

अपने आसपास कुछ लोगों को आप जुझारु, सनकी या जिद्दी कहते हैं। इसकी वजह होता है उनका एक खास गुण कि उन्हें जो चाहिए, उसे वह हासिल करके ही दम लेते हैं। जिद्दी लोगों को अक्सर लोग कम पसंद करते हैं, मगर यह भी गलत नहीं है कि ऐसे ही लोगों में दुनिया को बदलने का साहस होता है। इस दुनिया में कुछ भी पाना है तो आपको थोड़ा तो जिद्दी बनना पड़ेगा। यह कहानी भी ऐसे ही एक जिद्दी लड़के की है, जिसका नाम था विराट। विराट पिछले कई साल से अपने शहर में होने वाली मैराथन में हिस्सा लेता था, लेकिन कभी रेस पूरी नहीं कर पाता था।

इस बार वह बहुत उत्साहित था, क्योंकि वह पिछले कई महीनों से रोज इस रेस की तैयारी कर रहा था। उसे अपने आप पूरा पर भरोसा था कि वह इस साल की मैराथन रेस जरूर पूरी कर लेगा। देखते ही देखते मैराथन का वो दिन भी आ गया और सभी लोग एक जगह एकत्रित हुए और जैसे ही रेस शुरू हुई बाकी लड़को की तरह विराट ने भी दौड़ना शुरू किया।

वह जोश और हिम्मत से भरा हुआ था, और बड़े अच्छे ढंग से दौड़ रहा था। लेकिन आधी रेस पूरी करने के बाद विराट बिलकुल थक गया और उसके मन में आया कि बस अब वहीं बैठ जाए। वह ऐसा सोच ही रहा था कि तभी उसने खुद को कहा। 

रुको मत विराट! आगे बढ़ते रहो, अगर तुम दौड़ नहीं सकते तो कम से कम जॉगिंग करते हुए तो आगे बढ़ सकते हो। तो बस आगे बढ़ो।

और विराट अब पहले की अपेक्षा धीमी गति से आगे बढ़ने लगा। कुछ किलोमीटर इसी तरह दौड़ने के बाद विराट को लगा कि उसके पैर अब और आगे नहीं बढ़ सकते, वह लड़खड़ाने लगा, विराट के अन्दर विचार आया, अब बस और नहीं बढ़ सकता! लेकिन एक बार फिर विराट ने खुद को समझाया!!

रुको मत विराट। अगर तुम जॉगिंग नहीं कर सकते तो क्या, कम से कम चल तो सकते हो तो बस चलते रहो। विराट अब जॉगिंग करने की बजाय धीरे-धीरे लक्ष्य की ओर बढ़ने लगा।

कई सारे लड़के विराट से आगे निकल चुके थे। चलते-चलते विराट को फिनिशिंग पॉइंट दिखने लगा, लेकिन तभी वह अचानक से लड़खड़ा कर गिर पड़ा। उसके दायें पैर की नसें खिंच गई थीं। जमीन पर पड़े-पड़े विराट के मन में खयाल आया, की अब मैं आगे नहीं बढ़ सकता, लेकिन अगले पल ही वो जोर से चिल्लाया। आज चाहे कुछ भी हो जाए, मैं ये रेस पूरी करके रहूँगा। ये मेरी जिद है माना मैं चल नहीं सकता लेकिन लड़खड़ाते ही सही लेकिन इस रेस को पूरी जरूर करूंगा।

विराट ने साहस दिखाया और एक बार फिर दर्द सहते हुए आगे बढ़ने लगा, और इस बार वह तब तक बढ़ता रहा जब तक उसने फिनिशिंग लाइन पार नहीं कर ली। और फिनिशिंग लाइन पार करते ही वह जमीन पर लेट गया उसके आंखों से आंसू निकलने लगे। विराट ने रेस पूरी कर ली थी, उसके चेहरे पर इतनी खुशी और मन में इतनी संतुष्टि कभी नहीं आई थी आज विराट ने अपनी जिद के कारण न सिर्फ एक रेस पूरी की थी बल्कि जिंदगी की बाकी रेसों के लिए भी खुद को तैयार कर लिया था।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है- 
- चलते रहने की जिद हमें किसी भी मंजिल तक पहुंचा सकती है। मुश्किलों के आने पर हार मत मानिए।
- ना चाहते हुए भी कई बार परिस्थितियां ऐसी हो जाती हैं कि आप बहुत कुछ नहीं कर सकते, पर ऐसे हालात को कुछ भी ना करने का बहाने मत बनाइए।

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  • Web Title:Success Tips: Do not Hesitate to Do Hard and tough Things in life