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सक्सेस मंत्र: सीखने की प्रक्रिया को टूटने न दें, यह लगातार चलती रहे

success mantra

आज हम डिजिटल पेमेंट की सुविधा से कई तरह की सेवाओं का लाभ उठा पा रहे हैं। इससे जुड़ी कई तरह की सहूलियतों ने फिनटेक स्टार्टअप को उभरने का मौका दिया है। इस क्षेत्र में ‘पेटीएम' अपनी जगह बना चुका है। अब एक दूसरा स्टार्टअप ‘जेटा' अपनी सफलता के नए पैमाने गढ़ रहा है। इस स्टार्टअप को सफलता की राह में लाने वाली शख्सीयतों में से एक हैं रामकी गड्डीपाटी। उन्होंने अपने स्टार्टअप की सेवाओं के दायरे को डिजिटल पेमेंट के अलावा एम्प्लॉई टैक्स बेनिफिट, ऑटोमेटेड कैफेटेरिया तक फैलाया है। 

कैसे हुए प्रेरित
आंध्र प्रदेश के रहने वाले रामकी गड्डीपाटी शुरू में एक डॉक्टर बनने का सपना देखते थे। लेकिन, 12वीं में बायोलॉजी न मिलने की वजह से उन्हें मजबूरन गणित विषय चुनना पड़ा। तब स्कूल में मिले अच्छे शिक्षकों ने न सिर्फ गणित के प्रति उनके लगाव को बढ़ाया, बल्कि उन्हें इंजीनियर बनने का रास्ता दिखाया। उन्हें बिट्स पिलानी में प्रवेश तो मिला, मगर कंप्यूटर साइंस में न मिल कर मैनेजमेंट स्टडीज में दाखिला मिला। उन्होंने कंप्यूटर प्रोग्रामिंग वैकल्पिक विषय के तौर पर पढ़ा। 

उन्हें कंप्यूटर की पहली क्लास से ही कोडिंग और कंप्यूटर से लगाव हो गया था। वह कहते हैं, ‘मेरे लिए हमेशा से परिणामों को जल्दी जानना जरूरी रहा है। जबकि पारंपरिक इंजीनियरिंग में परिणाम मिलने की प्रक्रिया थोड़ी लंबी होती है। लेकिन, कंप्यूटर साइंस ने मुझे यह सहूलियत दी कि मैं किसी योजना के बारे में सोचूं, उस पर काम करूं और उसे आजमाऊं।' उनके लिए कंप्यूटर प्रोग्रामिंग लगातार कुछ रचते रहने की प्रक्रिया बन गई। सबसे पहले उन्होंने अपने संस्थान के सांस्कृतिक उत्सव के लिए प्रोग्राम बनाया, जिससे छात्र कार्यक्रम की जानकारी कॉलेज वेबसाइट से हासिल कर सकते थे। फिर अपने लिए एक एमपी3 प्लेयर बनाया। 

संस्थान के बेहतरीन माहौल ने उन्हें अपने दायरे को फैलाने में मदद की। मैनेजमेंट स्टडी में डिग्री होने के बावजूद वह खुद को कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएट मानते थे। ग्रेजुएशन के बाद एक साल नौकरी की। फिर कंप्यूटर सिस्टम में मास्टर करने बिट्स पिलानी वापस आए।

यहां साल 2004 में पहली बार मोबाइल से नियंत्रित होने वाला होम ऑटोमेशन सिस्टम बनाया। लेकिन तब इस तरह के आइडिया के लिए माहौल आज की तरह मुफीद नहीं था। इसके बाद उन्होंने कई आइडिया पर काम किया। पर, सही रूप में सफलता मिली 2015 में स्टार्टअप जेटा के शुरू होने के बाद। इसे लेकर उनका मकसद साफ था, वह था कर्मचारियों, कॉर्पोरेट समूहों, व्यापारियों के लिए पेमेंट की लेन-देन को आसान, तेज और तमाम झंझटों से मुक्त बनाना। आज ‘जेटा टैक्स बेनिफिट', ‘जेटा एक्सप्रेस' सेवाएं टाटा मोटर्स, ओयो रूम्स जैसे ग्राहकों के बीच काफी पसंद की जा रही हैं। 

प्रोग्रामिंग कला की तरह है, जहां आप किसी चीज के बारे में सोचते हैं, उसे बनाते हैं। इसमें आप किसी और चीज पर निर्भर नहीं होते, यही इसकी ताकत है।- रामकी गड्डीपाटी, फिनटेक स्टार्टअप ‘जेटा' के सह-संस्थापक व सीटीओ

काम की बात 
अगर तकनीकी पेशेवर कुछ अलग करना चाहते हैं तो उन्हें किसी प्रोडक्ट के प्रति जज्बा दिखाने की बजाय किसी समस्या को दूर करने का जज्बा दिखाना होगा।

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