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सक्सेस मंत्र: कुछ करने के बाद ही सीख मिलती है और उसके बाद सफलता

क्षितिज मारवाह, स्टार्टअप ‘टेसेरेक्ट इमेजिंग’ के संस्थापक व सीईओ (साभारः jaipuria.ac.in)

क्षितिज मारवाह पेशे से एक आविष्कारक हैं और अपने स्टार्टअप ‘टेसेरेक्ट इमेजिंग’ के जरिये नए दौर के उपकरण बना रहे हैं। वह ‘एमआईटी मीडिया लैब’ के प्रमुख रह चुके हैं। वह भारत में इसके जरिये आविष्कार के लिए अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को एक मंच पर लाए। इन्हें तमाम उपलब्धियों और खोजों के चलते फोब्र्स ने अपनी 2018 की 30 अंडर 30 सूची में जगह दी है।

कैसे हुए प्रेरित: क्षितिज को आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई के अपने आखिरी साल में हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज से जुड़ने का मौका मिला। वहां कंप्यूटर साइंस की अपनी समझ को उन्होंने वैज्ञानिकों, डिजाइनरों और इंजीनियरों के साथ काम करके और बढ़ाया। उन्हें हार्वर्ड में शानदार अनुभव मिला। हालांकि उन्हें आईआईटी से अपना कोर्स पूरा करने के लिए वापस आना पड़ा, लेकिन इस अनुभव से करियर को लेकर उनका नजरिया स्पष्ट हुआ। 
उन्होंने जाना कि हमारे संस्थानों में सीखने-सिखाने का माहौल एक विषय तक सीमित रहता है, जबकि किसी आविष्कार के लिए बहुविषयक अध्ययन का माहौल विकसित करने की जरूरत है।

वह आईआईटी से ग्रेजुएट भी नहीं हुए थे कि उन्हें स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय की फेलोशिप मिल गई। इससे उन्हें आविष्कार के बुनियादी माहौल को और बेहतर ढंग से समझने में मदद मिली।  आईआईटी से निकलने के बाद क्षितिज ने बड़ी और ज्यादा आमदनी वाली नौकरी के बजाय कुछ अलग करने की सोची। साल 2011 की शुरुआत में उन्होंने अपने एक दोस्त की सलाह पर एमआईटी मीडिया लैब में जाने का मन बनाया। उन्हें इसमें चुन लिया गया। वह मीडिया लैब में काम के माहौल से काफी प्रेरित थे। वहां सभी मिलजुल कर काम करते थे। लैब में अलग-अलग क्षेत्रों के पेशेवर किसी एक योजना पर काम कर रहे थे। उनका इसे देख कर पहला सवाल था कि यह माहौल भारत में क्यों नहीं है? यहां कुछ नया खोज लेने का माहौल उन्हें बहुत अच्छा लगा। वह देश में आविष्कार को बढ़ावा देने के लिए एमआईटी मीडिया लैब की अवधारणा को भारत लाए। उन्होंने देश के प्रतिभाशाली युवाओं को इस लैब की सहूलियत से जोड़ा। इस मंच से कई स्टार्टअप और योजनाएं साकार हुईं। साल 2013 में क्षितिज को लगा कि अब अपना कोई हार्डवेयर प्रोडक्ट बाजार में उतारा जाए। इसके लिए उन्होंने स्टार्टअप ‘टेसेरेक्ट इमेजिंग’ की स्थापना की। तब से वे समाज की तमाम समस्याओं का रचनात्मक हल खोजने में लगे हुए हैं। 

कहानी से सीखः

1. कुछ नया रचने के लिए जानकारी का बहुआयामी होना जरूरी है, तभी सभी के लिए उपयोगी कुछ नया आविष्कार किया जा सकता है।

2. हमें कुछ करने के बाद ही जानकारी और मिलती है।

3. प्राप्त जानकारी और पिछली नाकाम कोशिशों से सीख लेते हुए ही एक सफल कदम उठाया जाता है।

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  • Web Title:success mantra you learned after attempting something