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20 अक्तूबर, 2020|11:32|IST

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सक्सेस मंत्र : कामयाबी के लिए आत्मविश्वास जरूरी होता है और इसे अपने भीतर जगाना पड़ता है

success mantra

सपने देखना यदि सफलता की दिशा में पहला कदम है तो खुद पर भरोसा करना दूसरा कदम। इन दोनों के आधार पर ही आपके बाकी सारे प्रयास उस मुकाम तक ले जाते हैं, जहां आप दूसरों के लिए उदाहरण बन जाते हैं। सफल होने का सपना सभी लोग देखते हैं। लेकिन सिर्फ सपना देखने से ही सफलता नहीं मिल जाती। सपने को हकीकत में बदलने के लिए समर्पण और मेहनत की आवश्यकता पड़ती है, पर बाद की तमाम चीजें बेकार हो सकती हैं, अगर आपको खुद पर ही विश्वास न हो। वास्तव में अपने लिए लक्ष्य तय करना कामयाबी की दिशा में पहला कदम है तो आत्मविश्वास उस तक पहुंचने के लिए दूसरा आवश्यक कदम है। राजस्थान के जयपुर जिले के किशनगढ़-रेनवाल में रहने वाले नरेंद्र कुमार गर्वा की कहानी इसकी जीती-जागती मिसाल है। वह न केवल एक आम ग्रामीण युवा से आगे बढ़कर एक सफल मोती-उत्पादक के रूप में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे हैं बल्कि अच्छी-खासी कमाई भी कर रहे हैं। 

लक्ष्य का निर्धारण
ग्रामीण परिवेश में गर्वा के लिए आय के साधन और अवसर दोनों सीमित थे। लेकिन वह हमेशा एक बेहतर मुकाम हासिल करने की सोचते थे। सबसे पहले उन्होंने छत पर सब्जियों की खेती शुरू की, लेकिन इस काम से कुछ खास हाथ नहीं आया। विषय के चुनाव में कोई कमी नहीं थी, पर इससे जुड़ी अन्य व्यावहारिक जटिलताओं का अनुमान नहीं होने के कारण ऐसा नतीजा निकला। ऐसे में  अगला विकल्प उन्हें मोती की खेती अर्थात पर्ल फार्मिंग में नजर आया। 

रास्ते का चुनाव : ज्यादातर लोग बना-बनाया रास्ता चुनना पसंद करते हैं। वे सफलता तो चाहते हैं, पर जोखिम उठाना नहीं चाहते। यह दरअसल खुद पर भरोसा नहीं होने के कारण होता है। गर्वा को पर्ल फार्मिंग का चुनाव करते वक्त पता था कि यह कोई पारंपरिक काम नहीं है। लेकिन इस नई चीज को आजमाने के लिए वह तैयार थे। 
आवश्यक तैयारी : हरेक काम की कुछ बुनियादी शर्तें होती हैं। उन्हें पूरा किए बगैर आप उस काम में सफल नहीं हो सकते। सीप से मोती के उत्पादन में तकनीकी निपुणता की जरूरत थी, जिसकी तलाश गर्वा को भुवनेश्वर के एक केंद्र तक ले गई, जहां इसका प्रशिक्षण उपलब्ध था। 

सफलता का स्वाद
लगभग चार साल बीतते न बीतते गर्वा की कोशिश का परिणाम दिखने लगा। वर्तमान समय में वह एक सफल मोती-उत्पादक बन चुके हैं। उनके अनुसार, पर्ल फार्मिंग से एक साल में उन्हें लगभग छह लाख रुपये की आय होने लगी है।  

भविष्य की राह 
इस व्यक्तिगत प्रयास की सफलता ने दूसरे अनेक लोगों को भी आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपना उद्यम शुरू करने की पे्ररणा दी है। गर्वा अब दूसरों को पर्ल फार्मिंग का प्रशिक्षण दे रहे हैं और लगभग एक सौ लोगों को प्रशिक्षित कर चुके हैं। उनकी अपनी फार्मिंग को और व्यापक स्तर पर ले जाने की योजना है।  

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  • Web Title:Success Mantra : Success requires self confidence