Success Mantra learn success lesson from failures read this motivational story - Success Mantra : नाकामी से सीखा सफलता का सबक, कॉग्नीटेंसर के सह-संस्थापक आशीष ऐरॉन की प्रेरणादायक कहानी DA Image
20 फरवरी, 2020|5:48|IST

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Success Mantra : नाकामी से सीखा सफलता का सबक, कॉग्नीटेंसर के सह-संस्थापक आशीष ऐरॉन की प्रेरणादायक कहानी

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कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर आधारित स्टार्टअप कॉग्नीटेंसर के सह-संस्थापक आशीष ऐरॉन अपने स्कूली दिनों में औसत छात्र थे। तब उन्होंने सभी परीक्षाएं पास कीं, पर दिल्ली यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर साइंस में स्नातक करने के दौरान वह चौथे सेमेस्टर में प्रॉबेबिलिटी एग्जाम में फेल हो गए। इससे उन्हें बड़ा झटका लगा। लेकिन निराश होने की बजाय नाकामी से सबक लेते हुए उन्होंने खुद को अपने लक्ष्य के लिए समर्पित कर दिया और वह मुकाम हासिल किया, जो आज किसी भी युवा के लिए मिसाल है।


विफलता बनी वरदान :28 वर्षीय आशीष के अनुसार, परीक्षा में फेल होना उनके लिए वरदान साबित हुआ। उन्होंने जमकर मेहनत की। नतीजतन स्नातक अंतिम वर्ष की परीक्षा में वह प्रथम श्रेणी (ऑनर्स) से पास हुए। इसी बीच उन्होंने कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स करने के लिए ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी जाने की सोची। लेकिन सबने कहा कि एक बार फेल होने के कारणवहां दाखिला नहीं हो पाएगा। आखिरकार उन्होंने खुद पर भरोसा करते हुए स्वतंत्र रूप से आवेदन किया और दाखिला पाने में सफल रहे।

 

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एआई स्टार्टअप : इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज उनके पास ऑक्सफोर्ड की डिग्री है और वह कॉग्नीटेंसर के सह-संस्थापक के रूप में पहचान बना चुके हैं। नोएडा आधारित इस स्टार्टअप को इस साल अपने राजस्व में 300 फीसदी की बढ़त हासिल करने की उम्मीद है। वह एम्स से हाथ मिलाने की प्रक्रिया में है।


खुद पर भरोसा : ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई पूरी करने के बाद आशीष शोध सहयोगी के रूप में फ्रैंकफर्ट चले गए थे। लेकिन सात माह बाद ही वह ब्रिटेन लौट गए और जनवरी 2016 में अपना स्टार्टअप शुरू किया और उसका नाम मेटाटेंसर रखा। इसका मकसद एआई की मदद से शोधकर्ताओं को डाटा साइंस से जुड़ी समस्याएं हल करने के लिए अपने मूल प्लेटफॉर्म डीपऑप्टिक्स से जोड़ना था, जो विभिन्न संगठनों को पूर्वानुमान आधारित निर्णय करने में मदद करता है।


देश वापसी : मेटाटेंसर ने ब्रिटेन में दो साल तक काम किया। लेकिन भारत में व्यापक संभावनाएं देखते हुए आशीष ने दिल्ली लौटने का निर्णय किया। जनवरी 2018 में वह भारत आ गए और दिग्गज उद्यमी पंकज माथुर और अरुण अग्रवाल के साथ मिलकर कॉग्नीटेंसर की स्थापना की।


कामयाबी का विस्तार : मेटाटेंसर के अनुभवों का लाभ उठाते हुए आशीष ने महज छह महीने में कॉग्नीटेंसर को लाभ की स्थिति में पहुंचा दिया। पहले ही साल कॉग्नीटेंसर ने दो करोड़ रुपये का राजस्व कमाया। वर्तमान में यह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के साथ हाथ मिलाने की प्रक्रिया में है, ताकि कुछ बीमारियों का अनुमान उनके होने के बहुत पहले ही लगाया जा सके। आज आशीष के पास 25 लोगों की टीम है। वह अब और आगे की सोच रहे हैं।


असफलता का अर्थ अंत नहीं होता, वह अगले प्रयास को और मजबूत बनाने का संकेत होता है। दिल्ली के युवा उद्यमी आशीष ऐरॉन की सफलता की कहानी यही संदेश कहती है। खुद पर भरोसा करना और अपनी क्षमता को पहचानना जरूरी है। यह लक्ष्य तक पहुंचने की बुनियादी शर्त है।

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