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21 जनवरी, 2020|2:11|IST

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सक्सेस मंत्र: अमीरी गरीबी नहीं बल्कि आपका जज्बा तय करता है आपकी सफलता का पैमाना

safin hasan

मां घरों में रोटी बेलने का काम करती थीं तो पिता घर चलाने और बच्चों को पढ़ाने के लिए इलेक्ट्रिशियन के काम के साथ जाड़ों में अंडे और चाय का ठेला लगाने का काम  करते थे। घर की गरीबी भी जिस मासूम को उसके सपने पूरे करने से नहीं रोक सकी। ऐसी ही एक कहानी है देश के सबसे कम उम्र सिर्फ 22 साल में IPS बनने वाले साफीन हसन की।

साफीन हसन ने 2017 यूपीएससी परीक्षा में 570 रैंक हासिल की और मात्र 22 साल की उम्र में आईपीएस बनें। देशभर में सबसे कम आयु में आईपीएस अधिकारी बने साफीन हसन को जामनगर में नियुक्त किया गया है। वे 23 दिसंबर से पुलिस अधीक्षक के रूप में ये कार्यभार संभालेंगे। आइए जानते हैं क्या है इनके संघर्ष की कहानी।

गरीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं साफीन-
साफीन गुजरात के सूरत जिले के रहने वाले हैं। उनके माता-पिता एक हीरे की यूनिट में काम करते थे। लेकिन दुर्भाग्यवश साफीन के माता-पिता की नौकरी चली गई। जिसेक बाद घर का खर्च उठाने के लिए उनकी मां लोगों के घरों में रोटी बेलने का काम तो वहीं, पिता ने इलेक्ट्रिशियन के काम ते साथ जाड़ों में अंडे और चाय का ठेला लगाने का काम किया।    


यूपीएससी क्वालिफाई करने की प्रेरणा मिली ऐसे-
एक बार साफीन के प्राइमरी स्कूल में वहां के कलेक्टर आए हुए थे तो वहां मौजूद लोग उन्हें देखकर बड़ी तहजीब से पेश आने लगे। जिसे देख मासूम साफीन को बड़ा आश्चर्य ही हुआ। अपने आश्चर्य को दूर करने के लिए साफीन ने अपनी मौसी से इस बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि कलेक्टर किसी जिले का राजा होता है। कोई भी व्यक्ति अच्छी पढ़ाई करके कलेक्टर बन सकता है। जिसके बाद हसन ने भी कलेक्टर बनने की ठान ली थी। 

जब आधी से ज्यादा फीस हुई माफ-
हसन ने अपनी प्राइमरी की पढ़ाई सरकारी स्कूल में रहकर गुजराती मीडियम से की है। हसन ने 10वीं में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। जिसके बाद साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के लिए वो उनके जिले में खुले एक प्राइमरी स्कूल में दाखिला लेना चाहते थे। जिसकी फीस बहुत ज्यादा थी। हसन की काबिलियत देख स्कूल ने उनकी आधी से ज्यादा फीस माफ कर दी। जिसके बाद 11वीं कक्षा से उन्होंने अंग्रेजी सीखना शुरू किया। हसन अपने हॉस्टल खर्च के लिए छुट्टियों में बच्चों को पढ़ाते थे। 

मुसीबतों से रहा चोली दामन का रिश्ता-
यूपीएससी के पहले अटेंप्ट के समय हसन का एक्सीडेंट हो गया फिर भी वे परीक्षा देने गए । बाद में उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था। आज हसन का सपना है कि वो अपने गांव में एक शानदार रेजिडेंशियल स्कूल खोल पाएं ताकि गरीब बच्चों को अच्छी गुणवक्तापूर्ण शिक्षा मिल सके। 

सीख-
-जब मुसीबतें आती हैं तभी तकदीर चमकती है।
-मुसीबतों से घबराकर वापस लौटने की जगह कड़ी मेहनत से आगे बढ़ना चाहिए। 
-किसी भी परीक्षा में सफल होने के साथ उसके लिए पॉजिटिव एटीट्यूड होना भी बेहद जरूरी है।  

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  • Web Title:success mantra: Know the real success story of 22 year old youngest ips officer safin hasan