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29 अक्तूबर, 2020|9:20|IST

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सक्सेस मंत्र : सपना जितना बड़ा होता है, उतने ही धैर्य की मांग करता है

success mantra

सफलता की किसी भी कहानी में प्रतिस्पर्धा का एक अध्याय जरूर होता है। शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसे किसी चुनौती से निपटे बगैर अपना मुकाम मिल गया हो। ज्यादातर लोग प्रतिस्पर्धा या चुनौती को हमेशा दूसरी तरफ से आने वाली चीज मानते हैं। उनके जेहन में यह बात आती ही नहीं कि सफलता की दौड़ में वे खुद भी किसी के लिए चुनौती बन सकते हैं। अगर ऐसी सोच आ जाए तो अवसर मिलने का इंतजार करने की बजाय आप अवसर पैदा करने की अपनी क्षमता को पहचान लेते हैं। फिर आप ऐसे मुकाम तक पहुंच सकते हैं, जहां आपको किसी के पीछे नहीं चलता पड़ता, बल्कि दूसरे लोग आपका अनुकरण करते हैं। नोएडा का ‘ऑलऑथर’ इसका एक अच्छा उदाहरण है, जिसने महज दस साल के भीतर उल्लेखनीय कामयाबी हासिल की है। 

कैसे हुई शुरुआत : ब्रांडिंग और विज्ञापन के मौजूदा दौर में किसी भी चीज को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए न सिर्फ उसका अच्छा होना जरूरी है, बल्कि उसका पर्याप्त प्रचार होना भी आवश्यक है। इस सच्चाई को समझते हुए नवीन जोशी और मधुकर जोशी ने 2010 में ऑलऑथर स्टार्टअप शुरू किया। नवीन के अनुसार, उन्होंने लेखकों की किताबों के प्रमोशन के लिए एक प्लैटफॉर्म बनाने में व्यावसायिक संभावनाएं देखीं, जिसके परिणामस्वरूप यह काम शुरू हुआ।

अवसर का निर्माण : बेशक यह प्रचार-प्रसार जैसे जाने-पहचाने कार्य से  जुड़ी एक पहल थी, जो लेखक और पाठक के विशेष वर्ग पर केंद्रित थी। यह लेखकों को व्यक्तिगत ब्रांडिंग के लिए सहज-सरल टूल्स मुहैया कराने और उनकी किताबों को सोशल मीडिया समेत ऑनलाइन माध्यमों पर प्रचारित करने के लिए था। लेकिन यहां खास यह था कि इसने जाने-पहचाने दायरों में अवसर खोजने की बजाय खुद एक ऐसा अवसर सृजित किया, जिसकी संभावनाओं पर अब तक पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था। 

मेहनत और धीरज : कोई भी सपना जितना बड़ा होता है, वह उतने ही बड़े धैर्य की मांग करता है। ऑलऑथर ने जिन संभावनाओं को देखकर कार्य शुरू किया था, वह एक दिन में सच नहीं हो सकता था। लेकिन इससे जुड़े नवीन व मधुकर ने धैर्य रखा और लगातार मेहनत की। फिलहाल उससे दुनियाभर के करीब पांच हजार लेखक जुड़े हुए हैं जबकि उसके मंच पर लगभग 60 हजार पाठक हैं। उसकी सेवाएं लेने वालों में ज्यादातर लेखक अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और भारत के हैं।  

उम्मीदों भरा भविष्य : एक दशक पहले 10 लाख रुपये के निवेश से शुरू हुए इस स्टार्टअप की मानें तो अब इसका सालाना राजस्व 66 लाख से अधिक का हो चुका है। एक आकलन के अनुसार, यह  सालाना 19 फीसदी से भी अधिक की दर से बढ़त हासिल कर रहा है। निकट भविष्य में उसकी और विस्तार की योजना है।                                         

सीख: किसी दूसरे की ओर से आया अवसर भी सफलता दे सकता है, पर यह वैसा मुकाम नहीं दे सकता जो अपने लिए खुद अवसर पैदा करने से मिलता है। पहली स्थिति में आप अनुकरण करते हैं, जबकि दूसरी में आप नेतृत्व करते हैं।

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  • Web Title:Success mantra : dream demands patience read this story of great successful journey