सक्सेस मंत्र: असफलता से निराश न हों, उसके कारणों को खाजें

लाइव हिन्दुस्तान टीम, नई दिल्ली
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इंसान जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए बहुत मेहनत करता है। लेकिन जब वह सफल नहीं हो पता है तो निराश हो जाता है और मेहनत करना छोड़ देता है। इस बात को अगर दूसरे नजरिए से देखा जाए तो हमारे जीवन में आने वाली...

सक्सेस मंत्र: असफलता से निराश न हों, उसके कारणों को खाजें

इंसान जिंदगी में आगे बढ़ने के लिए बहुत मेहनत करता है। लेकिन जब वह सफल नहीं हो पता है तो निराश हो जाता है और मेहनत करना छोड़ देता है। इस बात को अगर दूसरे नजरिए से देखा जाए तो हमारे जीवन में आने वाली असफलताएं हमें तजुर्बा देती हैं और गलतियां करने से बचाती हैं। इसलिए इंसान को कभी मायूस नहीं होना चाहिए, उसे मेहनत करते रहना चाहिए। एक दिन ऐसा आएगा कि मेहनत का फल सफलता में बदल जाएगा। ऐसी ही कहानी है रोहित की। 

रोहित ने बड़े उत्साह से परीक्षा की तैयारी की। इसके बावजूद वह टॉप नहीं कर पाया और वह बहुत उदास व निराश रहने लगा। असफलता के गम में उसने पहले की तरह प्रयास करना छोड़ दिया। रोहित की इस परेशानी का पता जब उसके अध्यापक को पता लगा, जो उसके मार्गदर्शक थे तो उन्होंने एक दिन उसे अपने घर बुलाया। उन्होंने रोहित से परेशानी की वजह पूछी। रोहित ने उन्हें बताया की ‘उसने दिन रात मेहनत की पर जैसा वो चाहता था वैसे नतीजे नहीं आए इसलिए वो हताश हो चुका है।

रोहित की बात सुनने के बाद अध्यापक ने उसे अपने साथ बगीचे में चलने के लिए कहा। वो उसे टमाटर के पौधों के पास ले गए और बोले की इस टमाटर के इस खराब और मरे हुए पौधे को देखो।जब मैंने इस पौधे को बोया था तो मैंने इसे समय-समय पर सही मात्रा मे पानी दिया, खाद भी डाली और कीटनाशक का छिड़काव भी किया, पर फिर भी यह खराब हो गया। तो क्या?, रोहित बोला। इतनी सारी मेहनत, इतना पैसा और समय देने के बाद भी अगर जैसा रिजल्ट हम चाहते हैं वो न मिल पाए तो इतना सब कुछ करने से क्या फायदा है।

अध्यापक बोले ऐसा नहीं है और उन्होने एक दरवाजे की तरफ इशारा करते हुए कहा की एक बार जरा इस दरवाजे को खोल कर देखो। रोहित ने दरवाजे को खोला और देखा की सामने बड़े-बड़े टमाटरों के ढेर पड़े हुए थे। उसने पूछा की, ये सब कहां से आए? अध्यापक बोले, टमाटर के एक पौधे के खराब होने का मतलब यह नहीं है कि सभी पौधे खराब हो गए। इसी तरह तुमने मेहनत तो की पर टॉप नहीं कर पाए लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की तुम्हारी दिन रात की मेहनत खराब गई और तुम असफल हो गए। 

परीक्षा देते समय कई चीजें मायने रखती हैं, जिसमें लिखने की स्पीड, तबीयत, मनोस्थिति और भी बहुत कुछ जो सिर्फ मेहनत का पैमाना नहीं है। जो तुमने सीखा वो जिंदगी के हर मोड़ पर काम आएगा । मेहनत करने के बावजूद मनचाहा न मिलने का मतलब यह नहीं है की आप असफल हो गए। इसका मतलब है की आपने सफलता तक पहुचने की एक और सीढ़ी चढ़ी है। 

इस कहानी से मिलती है ये सीख

  • - आज हार हुई है, तो कल जीत भी हो सकती है। हार के गम में सुधार की कोशिश छोड़ देना समझदारी नहीं होती है।
  • - निराश होने की जगह ये सोचना चाहिए कि हमसे कहां चूक हुई है।
  • - रेस में लंबे समय तक बने रहना है तो तेज दौड़ने से ज्यादा फोकस देर तक दौड़ने पर करना चाहिए। 

Alakha Ram Singh

लेखक के बारे में

Alakha Ram Singh
करीब एक दशक से पत्रकारिता कर रहे अलख सिंह 'लाइव हिन्दुस्तान' में डिप्टी चीफ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। अलख बांदा (उत्तर प्रदेश) के रहने वाले हैं और उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से एमए इन मास कॉम्युनिकेशन किया है। अलख वर्ष 2014 से डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले करीब एक वर्ष तक प्रिंट मीडिया में रिपोर्टिंग/फ्रीलांसिंग भी कर चुके हैं। अलख 2016 में लाइव हिन्दुस्तान के साथ जुड़ने से पहले अमर उजाला और एनबीटी गुड़गांव में भी काम कर चुके हैं। और पढ़ें
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