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27 नवंबर, 2020|5:11|IST

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Success Mantra: कृतज्ञ बनने से शरीर ही नहीं दिल की सेहत भी रहती है दुरुस्त , जानें कैसे बनें कृतज्ञ

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कई बार हम उन चीजों की अनदेखी कर बैठते हैं, जिनके प्रति हमें कृतज्ञ होना चाहिए। या फिर हमारा अहं अंतर्मन की वास्तविक भावनाओं से हमें दूर कर देता है। जैसे ही हम आलोचना या नकार की बजाय स्वीकारना और सराहना सीखते हैं, कृतज्ञता की भावना जन्म लेने लगती है। यह भावना प्रेम, लगाव, सुंदरता और प्रसन्नता जैसे भावों को बढ़ावा देती है। 

कैसे बनें कृतज्ञ-
कृतज्ञता कैसे जाहिर की जाए, यह एक बड़ा सवाल है। खासतौर पर तब, जब हमारे आसपास की दुनिया बुरी खबरों या घटनाओं से भरी दिख रही हो, कृतज्ञ होना और भी कठिन हो जाता है। 

लेखिका-शिक्षिका डेना आकुरी कहती हैं कि जो कुछ भी आपके पास है, आप उसके लिए अगर कृतज्ञता जाहिर कर पाते हैं तो आप वास्तव में वर्तमान में जी पाते हैं। मनोवैज्ञानिक शोध भी बताते हैं कि कृतज्ञ बनने से न सिर्फ शरीर, बल्कि दिल की सेहत भी अच्छी रहती है। 

सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाएं-

कृतज्ञता तब जन्म लेती है, जब हम नकारने की बजाय स्वीकार्यता या सराहना का दृष्टिकोण अपनाकर जीवन से अपना नया रिश्ता कायम करते हैं। यहां ग्रीक दार्शनिक एपिक्यूरस की इस उक्ति को याद करने की जरूरत है— जो नहीं है, उसके बारे में सोचकर उन चीजों को न खोएं, जो आपके पास हैं। याद रखें, आज जो कुछ भी आपके पास है, कभी वह भी सिर्फ एक उम्मीद ही रहा होगा। 

अवसर न गंवाएं-
मन में यकायक किसी चीज के प्रति कृतज्ञता की भावना जागे तो उस अवसर को हाथ से न निकलने दें। थोड़ा ठहरें, अपने दिल के उस कोमल हिस्से पर ध्यान दें, जहां से ये प्यारी भावनाएं जन्म ले रही हैं। कृतज्ञता की भावना प्रेम और आनंद के अनुभवों से इसी तरह रू-ब-रू कराती है। इससे आप शरीर और मन के बीच एक रिश्ता कायम कर पाते हैं। हृदय में उपजी यह प्रेरणा कहती है कि कृतज्ञता का संदेश भेजा जा चुका है और अब वह आपकी कोशिकाओं तक पहुंच गया है। जिन चीजों के प्रति कृतज्ञ हैं, उन्हें अपनी कल्पना में देखने की कोशिश करें तो यह रिश्ता और मजबूत बन जाएगा। 

सोने से पहले करें ये काम-

एक और कारगर अभ्यास यह है कि सोने से पहले बिस्तर पर कुछ मिनट लेटकर अपने पूरे दिन के बारे में सोचें। सोचें कि दिन भर में ऐसा क्या हुआ, जिसके लिए आप वाकई कृतज्ञ थे। लेकिन उसे समझने की मोहलत न पा सके। इस बारे में कवि माया एंजेलो की यह बात भी महत्वपूर्ण है, जिसमें वह कहती हैं कि कृतज्ञता को वह तकिया बना लें, जिस पर बैठकर सोने से पहले प्रार्थना करते हैं। कृतज्ञता ध्यान की तरह है।  

अंतर्मन का एहसास
बहुत से लोग आभार तो जताते हैं, लेकिन उनकी भावना गहरी नहीं होती, खासतौर पर तब, जब इसकी प्रेरणा सांसारिक हो। अच्छी नौकरी, बड़ा घर, नई कार के लिए कृतज्ञता व्यक्त करना हर चीज को सतही बना देता है। भावना कुछ और गहरी हो तो हम अपने परिवार और अच्छे स्वास्थ्य के लिए आभार व्यक्त करते हैं। लेकिन अपने सबसे गहरे रूप में कृतज्ञता बताती है कि यह सृष्टि की देन है। यह पूरी तरह चेतना से पैदा होती है, और हमारे अंतर्मन के माध्यम से व्यक्त होती है। 

अहं को टूट जाने दें-
हम सबका अंतर्मन इसी खालिस चेतना से जुड़ा है। लेकिन मन का एक दूसरा पहलू भी है—अहं, जो जीवन को अपने स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करता है। अहं दो चीजों के बीच लगातार चुनता है—मैं यह चाहता हूं या मैं यह नहीं चाहता। हालांकि जिंदगी, इससे ज्यादा प्रेरित होती है कि आप क्या चाहते हैं, क्या नहीं चाहते, इससे ज्यादा फर्क नहीं पड़ता। यह प्रक्रिया उन मूल्यों को नजरअंदाज कर देती है, जो अंतर्मन में निहित हैं, जैसे— प्रेम, संवेदना, सत्य, सौंदर्य, रचनात्मकता, खोज और बदलाव। 

ध्यान की अवस्था- 
इनमें से कुछ मूल्य जीवन का आधार बनाने में मदद करते हैं, लेकिन यह हमारा पैदाइशी अधिकार है कि अंतर्मन में निहित मूल्यों से हम अधिकाधिक ग्रहण कर सकें। कृतज्ञता ही वह रास्ता है, जहां से उस मार्ग का पता मिलता है, जहां से हम अधिक पा सकते हैं, अपने अंतर्मन से जुड़कर और अपने हृदय से बोलकर। बुद्ध ने कृतज्ञता ध्यान की शिक्षा दी और इसे ‘हृदय को आनंदित करने वाला’ कहा। यह व्यक्तिको बताता है कि कैसे उन आनंद देने वाले अनुभवों पर विचार करे, जो आध्यात्मिक जागृति की खोज को प्रेरित करते हैं और उसे प्राप्त करने की क्षमता प्रदान करते हैं। आभार व्यक्त करने की औपचारिक रस्मों के साथ अंतर्मन के इस कृतज्ञता ध्यान की कोई तुलना नहीं हो सकती, फिर भी कृतज्ञता की शक्ति हासिल करने की दिशा में एक कदम तो बढ़ाया जा सकता है। 
                                         
दीपक चोपड़ा
भारतीय मूल के प्रसिद्ध अमेरिकी लेखक, आधुनिक मोटिवेशनल गुरु। वह 75 से अधिक किताबें लिख चुके हैं।

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  • Web Title:Success Mantra: Being grateful not only make you fit but keep your heart healthy as well know how to become grateful to others