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सक्सेस मंत्र: विश्व चैंपियनशिप जीतने वाली मानसी की कहानी, विपरीत हालत में भी नहीं हारी हिम्मत

mansi joshi

जिंदगी हम सबके सामने चुनौतियों का जाल फेंकती है। इस जाल में फंसने की जगह जो लोग मजबूती से इससे बाहर आ जाते हैं, वही असल में असली चैंपियन कहलाते हैं। ऐसी ही एक चैंपियन हैं, मानसी जोशी। जिन्होंने विश्व पारा बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतकर पूरे भारत को गर्व से भर दिया। लेकिन मानसी के लिए सफलता का ये सफर इतना आसान भी नहीं था।

30 वर्षिया मानसी ने मुंबई के के.जे. सोमैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से 2010 में इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग में डिग्री हासिल की है। उनकी जिंदगी में सबकुछ अच्छा चल रहा था कि साल 2011 में वह एक सड़क हादसे में बुरी तरह घायल हो गईं। स्थिति ऐसी आ गई कि उनका बायां पैर काटना पड़ा। इस घटना ने उनकी जिंदगी ही बदलकर रख दी।

आमतौर इस तरह के हालातों में लोग अवसाद में चले जाते हैं, लेकिन मानसी ने जिंदगी को पहले की ही तरह जीने का फैसला किया। मानसी की जीवटता और जज्बे का अंदाज इसी से लगाया जा सकता है कि जब उनका एक्सीडेंट हुआ था, तब भी उन्होंने अपना आपा खोए बिना वहां मौजूद एक लड़की को कहा कि फोन करके उनके घर पर इस घटना की सूचना दे दे। इतना ही नहीं वह आसपास के लोगों को भी बताती रहीं कि वे क्या करें। इस विकट स्थिति में भी वह हताश नहीं हुईं। हादसे के तुरंत बाद भी जिन चीजों पर वह नियंत्रण रख सकती थीं उन्होंने रखा। 

शौक बन गया जुनून-
खुद को फिट रखने के लिए शुरु किया बैडमिंटन वक्त के साथ उनका जुनून बन गया और वह इसमें आगे बढ़ती गईं। मानसी का कहना है कि उन्होंने 8-9 साल की उम्र में बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। लेकिन हादसे के बाद उन्होंने फिटनेस के लिए बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया जो बाद में उनके लिए जुनून सा बन गया। समय के साथ  उनके खेल में सुधार होता गया। मानसी की तमाम कोशिशों के बाद भी वो साल 2014 के पारा एशियाई खेलों के लिए नहीं चुनी गईं।लेकिन उनकी यह असफलता उनके पक्के इरादों और खुद पर रखे विश्वास को नहीं डिगा पाई और उन्होंने अगले साल खूब मेहनत करके विश्व पारा बैडमिंटन चैंपियनशिप मिक्स्ड डबल स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता। मानसी का मानना है कि केवल इच्छा करने से ही काम पूरे नहीं होते बल्कि उसके लिए कड़ा परिश्रम भी करना पड़ता है। विपरीत हालात आते रहते हैं लेकिन व्यक्ति को उनका सामना साहस के साथ करना चाहिए। 

सीख- जीवन से निराश हर दिव्यांग को मानसी का संदेश है कि वह जीवन से हार मानने की जगह अपनी लाइफ में कोई भी एक खेल जरूर अपनाएं। इस तरह आप खुद को दुनिया से अलग साबित कर पाएंगे। 

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