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Holi 2018: होलिका दहन में होलाष्टक की विशेषता, जानें

होलिका पूजन करने के लिए होली से आठ दिन पहले होलिका दहन वाले स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर उसमें सूखे उपले, सूखी लकड़ी, सूखी घास व होली का डंडा स्थापित कर दिया जाता है। जिस दिन यह कार्य किया जाता है, उस दिन को होलाष्टक प्रारम्भ का दिन भी कहा जाता है।जिस गांव, क्षेत्र या मोहल्ले के चौराहे पर पर यह होली का डंडा स्थापित किया जाता है, उसी क्षेत्र में होलिका दहन होने तक कोई शुभ कार्य संपन्न नहीं किया जाता है। वर्ष 2018 में 23 फरवरी से होलाष्टक शुरू हो चुके हैं, जो एक मार्च दोपहर बाद तक रहेंगे।

होलाष्टक में न करें ये कार्य
होलाष्टक मुख्य रूप से पंजाब और उत्तरी भारत में मनाया जाता है। होलाष्टक के दिन से एक ओर जहां उपरोक्त कार्यों का प्रारम्भ होता है। इसके अलावा कुछ कार्य ऐसे भी हैं जिन्हें इस दिन से नहीं किया जाता है। यह निषेध अवधि होलाष्टक के दिन से लेकर होलिका दहन के दिन तक रहती है। होलाष्टक के दिनों में 16 संस्कारों में से किसी भी संस्कार को नहीं किया जाता है। यहां तक की अंतिम संस्कार करने से पूर्व भी शान्ति कार्य किए जाते है। इन दिनों में 16 संस्कारों पर रोक होने का कारण इस अवधि को शुभ नहीं माना जाता है।

 

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)
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  • Web Title:importance of holi 2018
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