DA Image
8 अप्रैल, 2021|10:37|IST

अगली स्टोरी

Somvati Amavasya 2021: सोमवती अमावस्या के दिन बन रहे ये 2 घातक योग, जानिए इनका प्रभाव और इस दिन बनने वाले सभी शुभ-अशुभ मुहूर्त

हिंदू धर्म में हर महीने आने वाली पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनसार, हर माह में एक अमावस्या तिथि आती है। ऐसे में पूरे साल में कुल 12 अमावस्या पड़ती हैं। सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन हरिद्वार महाकुंभ का दूसरा शाही स्नान भी होगा। इस साल सोमवती अमावस्या के दिन वैधृति और विष्कंभ योग बन रहा है। खास बात यह है कि पूरे साल में सिर्फ एक ही सोमवती अमावस्या पड़ रही है।

सोमवती अमावस्या के दिन वैधृति योग दोपहर 2 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इसके बाद विष्कुम्भ योग लग जाएगा। जबकि इस दिन रेवती नक्षत्र सुबह 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगा, उसके बाद अश्विनी नक्षत्र लगेगा। चंद्रमा सुबह 11 बजकर 30 मिनट कर मीन राशि, उसके बाद मेष पर संचार करेगा। सूर्य मीन राशि में रहेंगे।

2021 में अक्षय तृतीया कब है? क्यों इस दिन सोना खरीदना माना जाता है शुभ

1. विष्कुम्भ योग : ज्योतिष शास्त्र में इस योग को विष से भरा हुआ घड़ा माना जाता है इसीलिए इसका नाम विष्कुम्भ योग है। जिस तरह से विष का सेवन करने पर सारे शरीर में धीरे-धीरे विष भर जाता है वैसे ही इस योग में किया गया कोई भी कार्य विष के समान होता है। यानी इस योग में किए गए कार्य का फल अशुभ होता है। 

2 .वैधृति योग : यह योग स्थिर कार्यों हेतु ठीक है परंतु यदि कोई भाग-दौड़ वाला कार्य अथवा यात्रा आदि करनी हो तो इस योग में नहीं करनी चाहिए।

हां में हां मिलाने पर ही खुश होते हैं ये 4 राशि वाले, जानिए क्या कहता है ज्योतिष शास्त्र

सोमवती अमावस्या के शुभ मुहूर्त-

ब्रह्म मुहूर्त- 04:17 ए एम, अप्रैल 13 से 05:02 ए एम, अप्रैल 13 तक।
अभिजित मुहूर्त- 11:44 ए एम से 12:35 पी एम तक। 
विजय मुहूर्त- 02:17 पी एम से 03:07 पी एम तक।
गोधूलि मुहूर्त- 06:18 पी एम से 06:42 पी एम तक।
अमृत काल- 08:51 ए एम से 10:37 ए एम तक। 
निशिता मुहूर्त- 11:46 पी एम से 12:32 ए एम, अप्रैल 13 तक।

वैभव लक्ष्मी व्रत कब से शुरू करना चाहिए? जानिए व्रत में क्या खाएं, महत्व व व्रत नियम

सोमवती अमावस्या के दिन बन रहे ये अशुभ मुहूर्त-

राहुकाल- 07:23 ए एम से 08:59 ए एम तक।
यमगण्ड- 10:34 ए एम से 12:10 पी एम तक।
गुलिक काल- 01:45 पी एम से 03:20 पी एम तक।
दुर्मुहूर्त- 12:35 पी एम से 01:26 पी एम तक।
गण्ड मूल- पूरे दिन ।
पंचक- 05:48 ए एम से 11:30 ए एम तक।

सोमवती अमावस्या का महत्व-

मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन व्रत रखने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। इस दिन पितरों का तर्पण भी किया जाता है। कहते हैं कि ऐसा करने से व्यक्ति को पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की परिक्रमा करना शुभ फलकारी माना गया है। मान्यता है कि पीपल के पेड़ में देवी-देवताओं का वास होता है। ऐसे में पीपल की पूजा करने से सभी देवता पूजित होते हैं। कहते हैं कि ऐसा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Somvati Amavasya 2021: Inauspicious yoga are being made on Somvati Amavasya know their effects and all Subh Muhurat