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28 फरवरी, 2021|11:34|IST

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Somvati Amavasya 2020 : विशेष योग में मार्गशीर्ष सोमवती अमावस्या आज, जानें महत्व व पूजा विधि

somvati amavasya 2020 to be celebrated tomorrow

Somvati Amavasya  2020: इस बार मार्गशीर्ष (अगहन) अमावस्या आज (14 दिसंबर 2020) को मनाई जाएगी। सोमवार को पड़ने के कारण इस बार इसे सोमवती अमावस्या पर्व के रूप में मनाई जाएगी। इस बार अमावस्या पर ग्रहण भी है जो एक दुर्लभ संयोग बना रहा है। सोमवती अमावस्या को स्नान, दान और पूजा-पाठ से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सोमवती अमावस्या पितरों को तर्पण करने के लिए भी बहुत शुभ मानी जाती है।

अमावस्या तिथि 14 दिसंबर:
अमावस्या तिथि प्रारम्भ : 13 दिसंबर 2020 को रात्रि 12:44 AM से 
अमावस्या तिथि समाप्त : 14 दिसंबर 2020 को रात्रि 09:46 PM तक (दृकपंचांग के अनुसार)

14 दिसंबर 2020 को सूर्योदय - 07:06 AM को और सूर्यास्त 05:26 PM को

सूर्य ग्रहण के साथ वृश्चिक में रहेंगे पांच ग्रह-
ज्योतिष के अनुसार, इस बार अमावस्या पर होने वाला सूर्य ग्रहण वृश्चिक राशि पर है। साथ ही वृश्चिक पर इस दौरान सूर्य के अलावा शुक्र, बुध, चंद्र और केतु भी मौजूद रहेंगे। इन सभी ग्रहों के विशेष योग से अमावस्या प्रत, स्नान आदि का पुण्य कई गुना ज्यादा बढ़ जाएगा।

 

2021 में सोमवती अमावस्या :
12 अप्रैल 2021: चैत्र अमावस्या
06 सितंबर 2021: अमावस्या

2021 की अमावस्या लिस्ट:
12-13 जनवरी 2021 को पौष अमावस्या
11 फरवरी 2021 को माघ अमावस्या
13 मार्च 2021 को फाल्गुन अमावस्या

सोमवती अमावस्या पर लगेगी पीपल की फेरी:
शास्त्रों और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, सुहागिन स्त्रियों को सोमवती अमावस्या के दिन स्नान आदि करने से पीपल के पेड़ की पूजा करना चाहिए। इस दिन पीपल के पेड़ की परिक्रमा (प्रदक्षिणा) करने का भी विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से वैवाहिक जीवन सुखी होता है और जिसके विवाह में विलंब हो रहा हो तो इस व्रत से शीघ्र विवाह होने के योग बनते हैं।वट का पीपल के साथ हुआ विवाह, अब शुरू होगी पूजा


महत्व और पूजा विध:
हिन्दू पौराणिक कथाओं में पूजा-उपासना के लिए अमावस्या और पूर्णिमा को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। कहते हैँ कि इस दिन पूजा करने से देवता आसानी से प्रसन्न होते हैं और भक्तों को आशीर्वाद देते हैं। इस दिन गंगा व अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने से कई यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती। अमावस्या को सूर्योंदय होते ही पवित्र नदियों, तालबों व जलाशयों में स्नान करना चाहिए। गंगा जी न जा सकें तो घर में ही पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर हर हर गंगे का उच्चारण करते हुए स्नान करें। इसके बाद देवालयों/मंदिरों में पूजा करें। गरीबों, साधुओं को दान दें, उन्हें भोजन कराएं। पूजा संपन्न होने तक व्रत का पालन करने का भी विधान है। 

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  • Web Title:Somvati Amavasya 2020: Margashirsha Somvati Amavasya in special yoga tomorrow know importance and method of worship