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हिंदी न्यूज़ धर्मShukra Pradosh Vrat 2022 Katha: ज्येष्ठ मास का पहला प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व व्रत कथा

Shukra Pradosh Vrat 2022 Katha: ज्येष्ठ मास का पहला प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व व्रत कथा

Shukra Pradosh Vrat 27 May 2022: प्रदोष व्रत का दिन भगवान शंकर को समर्पित माना गया है। भगवान शिव की इस दिन विधिवत पूजा करने से मनोकामना पूरी होने के साथ संकटों से मुक्ति मिलती है।

Shukra Pradosh Vrat 2022 Katha: ज्येष्ठ मास का पहला प्रदोष व्रत आज, जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि व व्रत कथा
Saumya Tiwariलाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीFri, 27 May 2022 05:56 AM

Shukra Pradosh Vrat 27 May 2022: हर माह की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। त्रयोदशी तिथि भगवान शंकर को समर्पित मानी गई है। प्रदोष व्रत का दिन शिव भक्तों के लिए खास होता है। इस दिन मां पार्वती व भगवान शिव की पूजा करने से मनोकामना पूरी होने की मान्यता है। प्रदोष व्रत दिन को पड़ता है, उसे उसी दिन के नाम से जानते हैं। ज्येष्ठ मास का पहला प्रदोष व्रत 27 मई 2022, शुक्रवार को पड़ रहा है, इसलिए यह शुक्र प्रदोष व्रत होगा। इस प्रदोष व्रत के दिन शोभन योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व सौभाग्य योग का निर्माण होने से इस दिन का महत्व और बढ़ रहा है। इस प्रदोष व्रत का पूरा लाभ पाने के लिए भगवान शिव का विधि-विधान के साथ पूजन करें। मान्यता है कि प्रदोष व्रत के दिन भोलेनाथ व माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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27 मई प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त (Pradosh Vrat Subh Muhurat 2022)-

ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 27 मई को सुबह 11 बजकर 47 मिनट पर आरंभ होगी, जो कि 28 मई 2022 को दोपहर 01 बजकर 09 मिनट पर समाप्त होगी। प्रदोष काल का समय 27 मई को शाम 07 बजकर 12 मिनट से रात 09 बजकर 14 मिनट तक रहेगा।

शुक्र प्रदोष व्रत महत्व-

शुक्र प्रदोष व्रत को सुख-समृद्धि में वृद्धि करने वाला बताया गया है। यह व्रत वैवाहिक जीवन में आने वाली दिक्कतों को दूर करता है। माता पार्वती व भगवान शंकर की कृपा से दांपत्य जीवन सुखमय होता है।

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प्रदोष व्रत पूजा- विधि (Pradosh Vrat Puja Vidhi)

सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
स्नान करने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र पहन लें।
घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
अगर संभव है तो व्रत करें।
भगवान भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक करें।
भगवान भोलेनाथ को पुष्प अर्पित करें।
इस दिन भोलेनाथ के साथ ही माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा भी करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है। 
भगवान शिव को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
भगवान शिव की आरती करें। 
इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।

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शुक्र प्रदोष व्रत की कथा (Shukra Pradosh Vrat Katha)-

कहा जाता है कि एक नगर में तीन मित्र रहते थे। राजकुमार, ब्राह्मण कुमार और तीसरा धनिक पुत्र। राजकुमार और ब्राह्मण कुमार विवाहित थे। धनिक पुत्र का भी विवाह हो गया था, लेकिन गौना शेष था। एक दिन तीनों मित्र स्त्रियों की चर्चा कर रहे थे। ब्राह्मण कुमार ने स्त्रियों की प्रशंसा करते हुए कहा नारीहीन घर भूतों का डेरा होता है। धनिक पुत्र ने यह सुना तो तुरन्त ही अपनी पत्‍नी को लाने का निश्‍चय कर लिया। तब धनिक पुत्र के माता-पिता ने समझाया कि अभी शुक्र देवता डूबे हुए हैं। ऐसे में बहू-बेटियों को उनके घर से विदा करवा लाना शुभ नहीं माना जाता लेकिन धनिक पुत्र ने एक नहीं सुनी और ससुराल पहुंच गया। ससुराल में भी उसे मनाने की कोशिश की गई लेकिन वो जिद पर अड़ा रहा और कन्या के माता पिता को उनकी विदाई करनी पड़ी। विदाई के बाद पति-पत्‍नी शहर से निकले ही थे कि बैलगाड़ी का पहिया निकल गया और बैल की टांग टूट गई।

दोनों को चोट लगी लेकिन फिर भी वो चलते रहे। कुछ दूर जाने पर उनका पाला डाकूओं से पड़ा। जो उनका धन लूटकर ले गए। दोनों घर पहुंचे। वहां धनिक पुत्र को सांप ने डस लिया। उसके पिता ने वैद्य को बुलाया तो वैद्य ने बताया कि वो तीन दिन में मर जाएगा। जब ब्राह्मण कुमार को यह खबर मिली तो वो धनिक पुत्र के घर पहुंचा और उसके माता पिता को शुक्र प्रदोष व्रत करने की सलाह दी। और कहा कि इसे पत्‍नी सहित वापस ससुराल भेज दें। धनिक ने ब्राह्मण कुमार की बात मानी और ससुराल पहुंच गया जहां उसकी हालत ठीक होती गई। यानि शुक्र प्रदोष के माहात्म्य से सभी घोर कष्ट दूर हो गए।

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