Janmashtami in Mathura: मथुरा, वृदांवन में कब मनेगी जन्माष्टमी? नोट कर लें डेट और पूजा-विधि

Janmashtami in Mathura: मथुरा, वृदांवन में कब मनेगी जन्माष्टमी? नोट कर लें डेट और पूजा-विधि

संक्षेप:

हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का बहुत अधिक महत्व होता है। भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है।

Sep 06, 2023 02:03 pm ISTShrishti Chaubey लाइव हिंदुस्तान, नई दिल्ली
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Vrindavan Janmashtami: हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का बहुत अधिक महत्व होता है। भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव को कृष्ण जन्माष्टमी के नाम से जाना जाता है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव बड़े ही धूम-धाम से मनाया जाता है। इस दिन श्री कृष्ण भगवान के बाल रूप यानी लड्डू गोपाल की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन व्रत भी रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्री कृष्ण का जन्म भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथी और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था। वहीं, श्री कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्री कृष्ण जन्मस्थान, द्वारिकाधीश और बांके बिहारी मंदिर में 6 सितंबर को मनाया जाएगा। श्री कृष्ण जन्मस्थान पर कृष्ण जन्माष्टमी 6-7 सितंबर की रात्रि में मनाई जाएगी।  

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शुभ मुहूर्त-

अष्टमी तिथि प्रारम्भ - सितम्बर 06, 2023 को 03:37 पी एम 
अष्टमी तिथि समाप्त - सितम्बर 07, 2023 को 04:14 पी एम
रोहिणी नक्षत्र प्रारम्भ - सितम्बर 06, 2023 को 09:20 ए एम
रोहिणी नक्षत्र समाप्त - सितम्बर 07, 2023 को 10:25 ए एम 

पूजा- विधि

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त हो जाएं और घर के मंदिर में साफ- सफाई करें। इसके बाद घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित कर लें। अब सभी देवी- देवताओं का जलाभिषेक करें और भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप यानी लड्डू गोपाल की विशेष पूजा- अर्चना करें। इस पावन दिन लड्डू गोपाल को झूले में बैठाया जाता है। लड्डू गोपाल को झूला झूलाएं और अपनी इच्छानुसार लड्डू गोपाल को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है। लड्डू गोपाल की सेवा पुत्र की तरह करें। इस दिन रात्रि पूजा का महत्व होता है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण का जन्म रात में हुआ था। रात्रि में भगवान श्री कृष्ण की विशेष पूजा-अर्चना करें। लड्डू गोपाल को मिश्री, मेवा का भोग भी लगाएं। लड्डू गोपाल की आरती करें।                                                                                               

नियम- जन्माष्टमी व्रत का पारण सूर्योदय के पश्चात अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के समाप्त होने के बाद किया जाना चाहिए। एकादशी उपवास के दौरान पालन किये जाने वाले सभी नियम जन्माष्टमी उपवास के दौरान भी पालन किए जाते हैं।

जन्माष्टमी व्रत के लाभ- जन्माष्टमी का व्रत करने से और भगवान श्रीकृष्ण की आराधना करने से संतान की कामना की पूर्ति होती है।

Shrishti Chaubey

लेखक के बारे में

Shrishti Chaubey
लाइव हिन्दुस्तान में बतौर कॉन्टेंट प्रोड्यूसर काम कर रही सृष्टि चौबे को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है। सृष्टि को एस्ट्रोलॉजी से जुड़े विषयों पर लिखने की अच्छी समझ है। इसके अलावा वे एंटरटेनमेंट और हेल्थ बीट पर भी काम कर चुकी हैं। सृष्टि ग्रह गोचर, नक्षत्र परिवर्तन, हस्तरेखा, फेंगशुई और वास्तु पर अच्छी जानकारी रखती हैं। खबर लिखने के साथ-साथ इन्हें वीडियो कॉन्टेंट और रिपोर्टिंग में भी काफी रुचि है। सृष्टि ने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। अपने कॉलेज के दिनों में इन्होंने डाटा स्टोरी भी लिखी है। साथ ही फैक्ट चेकिंग की अच्छी समझ रखती हैं। और पढ़ें
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