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Pitru Dosha : क्या आप भी है पितृ दोष से पीड़ित? यहां जानें पितरों की मुक्ति के उपाय

Pitru Dosha : क्या आप भी है पितृ दोष से पीड़ित? यहां जानें पितरों की मुक्ति के उपाय

संक्षेप:

shradh 2023 pitru paksha pitra dosh upay remedies : इस संबध में महाभारत के 13वें अध्याय में एक प्रसंग जरत्कारु ऋषि की आती है जो ब्रह्मचर्य जीवन ब्यतीत करते हुए जंगल में तपस्या कर रहे थे।

Sep 30, 2023 06:06 am ISTYogesh Joshi लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार कुंडली में दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें और दसवें भाव में सूर्य राहु या सूर्य शनि की युति बनने पर पितृ दोष लग जाता है। सूर्य के तुला राशि में रहने पर या राहु या शनि के साथ युति होने पर पितृ दोष का प्रभाव बढ़ जाता है। इसके साथ ही लग्नेश का छठे, आठवें, बारहवें भाव में होने और लग्न में राहु के होने पर भी पितृ दोष लगता है। पितृ दोष की वजह से व्यक्ति का जीवन परेशानियों से भर जाता है। 

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पितृ दोष उपाय-  इस दोष से मुक्ति के लिए श्राद्ध पक्ष में पितर संबंधित कार्य करने चाहिए। पितरों का स्मरण कर पिंड दान करना चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी भी मांगनी चाहिए।

पितृपक्ष में पितर संबंधित कार्य हैं जरूरी

अपने पूर्वजों को पितृपक्ष में तर्पण , श्राद्ध कर्म ,पिंडदान करने से हमारे पितृगण को तृप्ति मिलती है , और फल स्वरूप हमें आशीर्वाद प्राप्त होती है , और हम सब पितृदोष से मुक्त होते हैं। इस संबध में महाभारत के 13वें अध्याय में एक प्रसंग जरत्कारु ऋषि की आती है जो ब्रह्मचर्य जीवन ब्यतीत करते हुए जंगल में तपस्या कर रहे थे। एक दिन सन्ध्या काल को जंगल में घूमने निकले थोड़ी दूर जाने पर एक पेड़ पर कुछ पितृगण उल्टा टंगे दिखाई पड़ा , तो ऋषि जरत्कारु ने उन पितरों के पास जाकर पूछा कि आप लोग कौन हैं , और इस तरह उल्टे क्यों टंगे हैं , इसका कारण एवं मुक्ति का उपाय बताइए। तब पितरों ने बताया कि हमारे कुल में वंश बृद्धि की परम्परा समाप्त हो जाने के कारण हमारे कुल में कोई नहीं बचा है, जो हम सबों को पितृपक्ष में तर्पण, श्राद्ध , पिंडदान कर सके जिससे हम सबों की मुक्ति हो सकें।

Yogesh Joshi

लेखक के बारे में

Yogesh Joshi

संक्षिप्त विवरण


योगेश जोशी डिजिटल पत्रकारिता में 8 वर्षों से सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं। ज्योतिष और धार्मिक विषयों पर उनका लेखन पाठक-केंद्रित और व्यावहारिक दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है। राशिफल, ग्रह-गोचर, दशा-महादशा, अंकज्योतिष, सामुद्रिक शास्त्र, वास्तु, फेंगशुई और पूजा-विधि जैसे विषय उनके काम का प्रमुख हिस्सा हैं।


विस्तृत बायो


परिचय और अनुभव


योगेश जोशी ने डिजिटल मीडिया में काम करते हुए खबर और कंटेंट के बदलते स्वरूप को नजदीक से समझा है। पत्रकारिता में 8 वर्षों के अनुभव के साथ वह फिलहाल लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) के एस्ट्रोलॉजी सेक्शन में सीनियर कंटेंट प्रोड्यूसर की भूमिका निभा रहे हैं।


न्यूज़ और फीचर कंटेंट से शुरू हुआ उनका सफर आज ज्योतिष और धार्मिक विषयों तक पहुंच चुका है, जहां वह पारंपरिक ज्ञान को मौजूदा समय और डिजिटल पाठक की जरूरतों के हिसाब से प्रस्तुत करते हैं। उनका फोकस हमेशा इस बात पर रहता है कि कंटेंट जानकारी दे, उलझाए नहीं।


शैक्षणिक पृष्ठभूमि


योगेश जोशी ने मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई की है। पत्रकारिता की इस पढ़ाई ने उन्हें तथ्यों के साथ जिम्मेदारी और संतुलन बनाए रखने की समझ दी, जो उनके लेखन में साफ झलकती है।


करियर की शुरुआत और प्रोफेशनल सफर


योगेश ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत अमर उजाला के डिजिटल प्लेटफॉर्म से की। यहां उन्होंने डिजिटल न्यूज़, कंटेंट राइटिंग और एडिटिंग पर काम करते हुए मजबूत आधार तैयार किया। इसके बाद डिजिटल मीडिया में लगातार काम करते हुए उन्होंने एस्ट्रोलॉजी और धार्मिक विषयों से जुड़े कंटेंट में विशेषज्ञता विकसित की।
पाठक किस भाषा में बात समझता है और किस तरह की जानकारी उसके लिए उपयोगी होती है—यह समझ उनके प्रोफेशनल सफर की सबसे बड़ी ताकत रही है।

एस्ट्रोलॉजी लेखन और उद्देश्य


योगेश के लिए ज्योतिष केवल भविष्य बताने का जरिया नहीं है। वह इसे आत्मचिंतन और सही फैसलों में मदद करने वाले एक मार्गदर्शक के रूप में देखते हैं। इसी सोच के साथ वह राशिफल और अन्य ज्योतिषीय विषयों को संतुलित, व्यावहारिक और भरोसेमंद तरीके से प्रस्तुत करते हैं। उनका उद्देश्य पाठकों को डराना नहीं, बल्कि जानकारी के जरिए उन्हें सोचने और समझने की दिशा देना है।


व्यक्तिगत रुचियां


काम के अलावा योगेश को सामाजिक विषयों पर पढ़ना, लिखना और भारतीय परंपराओं को समझना पसंद है। उनका मानना है कि एक पत्रकार के लिए सीखना और खुद को अपडेट रखना सबसे जरूरी है।


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