
Pitru Dosha : क्या आप भी है पितृ दोष से पीड़ित? यहां जानें पितरों की मुक्ति के उपाय
shradh 2023 pitru paksha pitra dosh upay remedies : इस संबध में महाभारत के 13वें अध्याय में एक प्रसंग जरत्कारु ऋषि की आती है जो ब्रह्मचर्य जीवन ब्यतीत करते हुए जंगल में तपस्या कर रहे थे।
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार कुंडली में दूसरे, चौथे, पांचवें, सातवें, नौवें और दसवें भाव में सूर्य राहु या सूर्य शनि की युति बनने पर पितृ दोष लग जाता है। सूर्य के तुला राशि में रहने पर या राहु या शनि के साथ युति होने पर पितृ दोष का प्रभाव बढ़ जाता है। इसके साथ ही लग्नेश का छठे, आठवें, बारहवें भाव में होने और लग्न में राहु के होने पर भी पितृ दोष लगता है। पितृ दोष की वजह से व्यक्ति का जीवन परेशानियों से भर जाता है।
पितृ दोष उपाय- इस दोष से मुक्ति के लिए श्राद्ध पक्ष में पितर संबंधित कार्य करने चाहिए। पितरों का स्मरण कर पिंड दान करना चाहिए और अपनी गलतियों के लिए माफी भी मांगनी चाहिए।
पितृपक्ष में पितर संबंधित कार्य हैं जरूरी
अपने पूर्वजों को पितृपक्ष में तर्पण , श्राद्ध कर्म ,पिंडदान करने से हमारे पितृगण को तृप्ति मिलती है , और फल स्वरूप हमें आशीर्वाद प्राप्त होती है , और हम सब पितृदोष से मुक्त होते हैं। इस संबध में महाभारत के 13वें अध्याय में एक प्रसंग जरत्कारु ऋषि की आती है जो ब्रह्मचर्य जीवन ब्यतीत करते हुए जंगल में तपस्या कर रहे थे। एक दिन सन्ध्या काल को जंगल में घूमने निकले थोड़ी दूर जाने पर एक पेड़ पर कुछ पितृगण उल्टा टंगे दिखाई पड़ा , तो ऋषि जरत्कारु ने उन पितरों के पास जाकर पूछा कि आप लोग कौन हैं , और इस तरह उल्टे क्यों टंगे हैं , इसका कारण एवं मुक्ति का उपाय बताइए। तब पितरों ने बताया कि हमारे कुल में वंश बृद्धि की परम्परा समाप्त हो जाने के कारण हमारे कुल में कोई नहीं बचा है, जो हम सबों को पितृपक्ष में तर्पण, श्राद्ध , पिंडदान कर सके जिससे हम सबों की मुक्ति हो सकें।





