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30 मई, 2020|12:47|IST

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Mahashivratri 2020: जानें आज शिवरात्रि पर राशि के मुताबिक कैसे करें पूजा, क्या करें दान

सावन शिवरात्रि

Mahashivratri 2020: फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर आज महाशिवरात्रि श्रद्धा के साथ मनाई जा रही है। शिवालय हर हर महादेव, बम भोले, जय जय शिवशंकर, जय भोले शंकर जैसे जयकारों से गूंज उठे हैं। जलाभिषेक के लिए भक्तों की लंबी कतारें लग गई हैं। इस दिन भक्त भोलेनाथ की पूजा और व्रत करते हैं। महाशिवरात्रि शिव और शक्ति के मिलन की रात का पर्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शिवरात्रि की रात आध्यात्मिक शक्तियां जागृत होती हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि इस दिन ज्योतिष उपाय करने से आपकी सभी परेशानियां खत्म हो सकती हैं। महाशिवरात्रि के दिन शुभ काल के दौरान ही महादेव और पार्वती की पूजा की जानी चाहिए तभी इसका फल मिलता है। 

राशियों के अनुसार पूजन, दान 
मेष : भगवान शिव को दूध, दही, धतूरा, लाल रंग का पुष्प चढ़ाएं।
वृषभ : स्फटिक शिवलिंग की पूजा करें। लाल गुलाब, चंदन और कुमकुम चढाएं।
मिथुन : गन्ने के रस से अभिषेक करें और लाल मसूर की दाल गरीबों को दान दें।
कर्क : भगवान शिव का अष्टगंध और हल्दी से अभिषेक करें।
सिंह : केवड़े का पुष्प और विल्वपत्र अर्पित करें।
कन्या : बेर, धतूरा, भांग, विल्वपत्र और शिव को चढ़ाएं।
तुला : जल में सात प्रकार के पुष्प डालकर अभिषेक करें।
वृश्चिक : जल में शहद और घी डालकर अभिषेक करना चाहिए। 
धनु : चंदन से भगवान शिव का अभिषेक करें और सूखे मेवे का भोग लगाएं।
मकर : जल में काला तिल मिलाकर अभिषेक करें। गरीबों को गेहूं दान दें। 
कुंभ : भगवान शिव को भांग अर्पित करें और काले व सफेद तिल से पूजा करें।
मीन : जल में चने की दाल डालकर अभिषेक करना चाहिए। 

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महाशिवरात्रि पूजा का शुभ मुहू्र्त-
महाशिवरात्रि 21 तारीख को शाम को 5 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी कि 22 फरवरी दिन शनिवार को शाम सात बजकर 2 मिनट तक रहेगी।रात्रि प्रहर की पूजा शाम को 6 बजकर 41 मिनट से रात 12 बजकर 52 मिनट तक होगी। अगले दिन सुबह मंदिरों में भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा की जाएगी।

शिव पूजा का महत्व-
भगवान शिव की पूजा करते समय बिल्वपत्र, शहद, दूध, दही, शक्कर और गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति की सभी समस्याएं दूर होकर उसकी इच्छाएं पूरी होती हैं।

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शिवरात्रि का पौराणिक महत्व-
पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी पावन रात्रि को भगवान शिव ने संरक्षण और विनाश का सृजन किया था। मान्यता यह भी है कि इसी पावन दिन भगवान शिव और देवी पार्वती का शुभ विवाह संपन्न हुआ था। 

महाशिवरात्रि पूजा विधि -
शिवपुराण के अनुसार व्रती को प्रातः काल उठकर स्नान संध्या कर्म से निवृत्त होने पर मस्तक पर भस्म का तिलक और गले में रुद्राक्षमाला धारण कर शिवालय में जाकर शिवलिंग का विधिपूर्वक पूजन एवं शिव को नमस्कार करना चाहिए। तत्पश्चात उसे श्रद्धापूर्वक व्रत का इस प्रकार संकल्प करना चाहिए।
 

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