DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

शिव-पार्वती ने इस मंदिर में लिए थे फेरे 

इस सृष्टि की उत्पत्ति भगवान शिव की कृपा से हुई और यह शिव में ही विलीन हो जाएगी। देवों के देव महादेव और माता पार्वती के विवाह को लेकर कई पौराणिक कथाएं हैं। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में त्रियुगीनारायण नामक मंदिर है। पौराणिक महत्व वाले इस मंदिर से भी ऐसी ही मान्यता जुड़ी हुई है। इस मंदिर में सदियों से अग्नि प्रज्ज्वलित है। कहा जाता है कि इसी अग्नि के समक्ष भगवान शिव और देवी पार्वती ने फेरे लिए थे। 

वेदों में भी इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि यह मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है। कहा जाता है कि इस मंदिर में विवाह करने वालों का दांपत्य जीवन हमेशा सुखमय रहता है। हर साल इस मंदिर में हजारों विवाह होते हैं। सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए यहां आने वाले लोग यहां प्रज्ज्वलित अखंड अग्नि की भभूत साथ लेकर जाते हैं। 

इस मंदिर में प्रज्ज्वलित अग्नि को लेकर ही इस जगह का नाम त्रियुगी पड़ा, जिसका अर्थ है कि यह अग्नि यहां तीन युगों से प्रज्ज्वलित है। शिव-पार्वती के विवाह में भगवान ब्रह्मा पुरोहित बने और उन्होंने ही विवाह को संपन्न कराया था। विवाह स्थल के नियत स्थान को ब्रह्म शिला कहा जाता है। यहां तीन कुंड हैं, मान्यता है कि इन कुंड में स्नान करने से संतानहीनता से मुक्ति मिलती है।

(इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैंजिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।)

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Shiva-Parvati was married in this temple