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30 मई, 2020|11:43|IST

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Sheetala ashtami 2020: संतान को निरोगी रखने को पूजन

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होली के बाद शीतला सप्तमी मनाई गई। घरों में पकवान बनाए गए। इन पकवानों को अगले दिन सोमवार को शीतला माता को मंदिरों में चढ़ाया जाएगा। शीतला माता मंदिर में दिनभर भक्तों का रेला लगेगा। श्रद्धालु दिनभर उपवास रखेंगे और शीतला माता की पूजा-अर्चना कर बासी भोजन का भोग लगाएंगे। ऐसी मान्यता है कि शीतला अष्टमी का व्रत रखने से छोटी माता का प्रकोप नहीं होता। 

ज्योतिषाचार्य डॉ़ अरविंद मिश्र ने बताया कि ऐसा माना जाता है कि शीतला माता भगवती दुर्गा का ही रूप हैं। उपासना से जहां मनुष्य को आध्यात्मिक रूप से मजबूती मिलती है, वहीं शारीरिक और मानसिक रोगों को दूर करने का भी इसका उद्देश्य होता है। ऐसी मान्यता है कि चैत्र महीने से जब गर्मी प्रारंभ हो जाती है, तो शरीर में अनेक प्रकार के पित्त विकार भी प्रारंभ हो जाते हैं। शीतला माता का पूजन करने से शारीरिक शुद्धि, मानसिक पवित्रता और खान-पान की सावधानियों का संदेश मिलता है। 

पूजन विधि 
थाली में नैवेद्य, हल्दी, दही, धूपबत्ती, जल का पात्र, चीनी, गुड़ और अन्य पूजन आदि सामान सजाकर परिवार के सभी सदस्यों के हाथ से स्पर्श कराकर शीतला माता के मंदिर जाकर पूजन करना चाहिए। होलिका के दिन बनाई गई गुलड़िया की माला भी शीतला माता को अर्पित करने का विधान है। होली के जलाए गए स्थान पर जल चढ़ाकर पूजा करने की भी परंपरा है। शीतला माता के पूजन के बाद गदर्भ का पूजन कर मंदिर के बाहर काले कुत्ते के पूजन एवं गदर्भ को चने की दाल खिलाने की भी परंपरा है।  

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  • Web Title:Sheetala ashtami 2020: Worship to keep children healthy on Sheetala ashtami