Wednesday, January 19, 2022
हमें फॉलो करें :

मल्टीमीडिया

अगली खबर पढ़ने के लिए यहाँ टैप करें

हिंदी न्यूज़ धर्मशरद पूर्णिमा 2021 की डेट को लेकर है कंफ्यूज तो, ज्योतिषाचार्य से जानिए आज या कल किस दिन व्रत रखना रहेगा उत्तम

शरद पूर्णिमा 2021 की डेट को लेकर है कंफ्यूज तो, ज्योतिषाचार्य से जानिए आज या कल किस दिन व्रत रखना रहेगा उत्तम

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीSaumya Tiwari
Tue, 19 Oct 2021 07:00 PM
शरद पूर्णिमा 2021 की डेट को लेकर है कंफ्यूज तो, ज्योतिषाचार्य से जानिए आज या कल किस दिन व्रत रखना रहेगा उत्तम

इस खबर को सुनें

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस तिथि से शरद ऋतु का आरम्भ होता है। इस दिन चन्द्रमा संपूर्ण और सोलह कलाओं से युक्त होता है। इस दिन को 'कोजागर पूर्णिमा' (Kojagara Purnima) और 'रास पूर्णिमा' (Raas Purnima) के नाम से भी जाना जाता है। इस व्रत को 'कौमुदी व्रत' (Kamudi Vrat) भी कहा जाता है।

शरद पूर्णिमा 2021 के दिन इन 4 राशि वालों पर मां लक्ष्मी की रहेगी विशेष कृपा

मंगलवार शाम 6 बजकर 44 मिनट से अश्विन मास की पूर्णिमा शुरू हो रही है। इस दिन को शरद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन समुद्र मंथन से देवी लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। मान्यता है की शरद पूर्णिमा की रात्रि में आसमान से अमृत की बूंदें बरसती हैं। इसलिए तो शरद पूर्णिमा की चांदनी रात में खुले आसमान के नीचे खीर रखने की परंपरा है। मान्यता है कि अगली सुबह जो भी व्यक्ति अमृत युक्त इस खीर का सेवन करता है, वह तमाम रोग व व्याधियों से मुक्त होता है।

 शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए इस मुहूर्त में करें पूजा, यहां पढ़ें पावन व्रत कथा

शरद पूर्णिमा की तिथि पर कंफ्यूजन-

शरद पूर्णिमा की तिथि पर संशय बरकरार है। शरद पूर्णिमा कहीं मंगलवार तो कहीं बुधवार को मनाई जाएगी। इस सबंध में पंचांग व विद्वानों की अलग-अलग राय है। वेदाचार्य पंडित रमेशचंद्र त्रिपाठी के अनुसार, शरद पूर्णिमा 19 अक्टूबर की शाम 06 बजकर 44 मिनट पर शुरू होगी, जो कि 20 अक्टूबर, बुधवार की शाम 7 बजकर 37 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि मनाने वाले लोग 20 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा का व्रत रखेंगे। इस दिन सत्यनारायण भगवान का पाठ करना शुभ माना जाता है। 

शरद पूर्णिमा के दिन इन उपायों को करने से कभी नहीं होती पैसों की कमी, पढ़ें मान्यता

शरद पूर्णिमा मनाना कब उत्तम-

निर्णय सिंधू के अनुसार, ऐसी स्थिति में पूर्णिमा और प्रतिपदा एक ही दिन हो उसी दिन शरद पूर्णिमा मनानी चाहिए। वहीं मिथिला पंचांग के विशेषज्ञ पंडित गोपाल कृष्ण झा बताते हैं कि मिथिला में इसे कोजागरा पूजा कहते हैं। यह मुख्यत: चंद्रमा की पूजा है। चंद्र दर्शन और पूर्णिमा तिथि का मिलन 19 को ही संभव है। क्योंकि 20 अक्टूबर को जब तक चंद्रोदय होगा, तब तक पूर्णिमा की तिथि समाप्त हो चुकी होगी। ऐसे में शरद पूर्णिमा की पूजा करना 19 अक्टूबर को उत्तम रहेगा।

epaper
सब्सक्राइब करें हिन्दुस्तान का डेली न्यूज़लेटर

संबंधित खबरें