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साल 2024 में नहीं बदलेगी शनि की चाल, मकर, कुंभ समेत इन 3 राशि वालों पर रहेगी शनिदेव की टेढ़ी नजर

Shani Dev : शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या की वजह से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार साल 2024 में  मकर, कुंभ, मीन और कर्क, वृश्चिक पर शनि की टेढ़ी नजर रहेगी।

साल 2024 में नहीं बदलेगी शनि की चाल, मकर, कुंभ समेत इन 3 राशि वालों पर रहेगी शनिदेव की टेढ़ी नजर
Yogesh Joshiलाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीSun, 10 Dec 2023 11:18 PM
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ज्योतिषशास्त्र में शनिदेव को विशेष स्थान प्राप्त है। शनिदेव को पापी और क्रूर ग्रह कहा जाता है। शनिदेव के अशुभ प्रभावों से हर कोई भयभीत रहता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि शनिदेव सिर्फ अशुभ फल देते हैं। शनिदेव शुभ फल देते हैं। शनिदेव के शुभ होने पर व्यक्ति का भाग्योदय हो जाता है। शनिदेव ढ़ाई साल में एक बार राशि परिवर्तन करते हैं। शनिदेव के राशि परिवर्तन करने से कुछ राशि वालों पर शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या शुरू हो जाती है तो कुछ राशि वालों पर से साढ़ेसाती और ढैय्या हट जाती है। साल 2024 में शनि राशि परिवर्तन नहीं करेंगे। जिस वजह से मकर, कुंभ, मीन पर साढ़ेसाती और कर्क, वृश्चिक पर ढैय्या का प्रभाव रहेगा। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या की वजह से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ज्योतिष गणनाओं के अनुसार साल 2024 में  मकर, कुंभ, मीन और कर्क, वृश्चिक पर शनि की टेढ़ी नजर रहेगी। ये 5 राशि वाले शनि के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए शनिदेव की अराधना करें और शनिवार को शनिदेव को तेल अर्पित करें। रोजाना राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र का पाठ करने से भी शनिदेव के अशुभ प्रभावों से बचा जा सकता है। आगे पढ़ें राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र...

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  • राजा दशरथ कृत शनि स्तोत्र

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठनिभाय च।
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।
 
नमो निर्मांस देहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।
 
नम: पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णेऽथ  वै नम:।
नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।
 
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरीक्ष्याय वै नम:।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।
 
नमस्ते सर्वभक्षाय वलीमुखायनमोऽस्तुते।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च।।
 
अधोदृष्टे: नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोऽस्तुते।
नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।
 
तपसा दग्धदेहाय नित्यं  योगरताय च।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।
 
ज्ञानचक्षुर्नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मज सूनवे।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।
 
देवासुरमनुष्याश्च  सिद्घविद्याधरोरगा:।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।
 
प्रसाद कुरु  मे  देव  वाराहोऽहमुपागत।
एवं स्तुतस्तद  सौरिग्र्रहराजो महाबल:।।

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