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पंचांग-पुराणShani Sade Sati: इन 3 राशियों को शनि के बुरे प्रभाव से मिलने वाली है मुक्ति, जानें शनि की साढ़े साती व शनि ढैय्या से बचाव के उपाय

लाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीPublished By: Saumya Tiwari
Wed, 12 May 2021 09:10 AM
Shani Sade Sati: इन 3 राशियों को शनि के बुरे प्रभाव से मिलने वाली है मुक्ति, जानें शनि की साढ़े साती व शनि ढैय्या से बचाव के उपाय

ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को खास महत्व दिया जाता है। आमतौर पर लोगों की धारणा होती है कि शनि देव अपनी साढ़े साती और ढैय्या महादशा पर सिर्फ नकारात्मक परिणाम देते हैं। लेकिन शनिदेव हमेशा बुरे परिणाम ही देते हैं, ऐसा नहीं है। जातक की जन्म कुंडली में शनि शुभ स्थिति में विराजमान हों तो वह सुख-सुविधा, समृद्धि आदि प्रदान करते हैं। शनि के शुभ स्थान पर होने से व्यक्ति को कम मेहनत पर ही सफलता हासिल हो जाती है। जानिए किन राशि वालों को शनि की महादशा से मिलने वाली है मुक्ति-

शनि के अगले साल कुंभ राशि में गोचर करते ही धनु राशि वालों पर शनि की साढ़े साती का असर खत्म हो जाएगा। धनु राशि पर शनि की साढ़े साती का अंतिम चरण चल रहा है। जबकि मिथुन व तुला राशि वालों पर शनि की ढैय्या खत्म हो जाएगी। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शनि 12 जुलाई 2022 को वक्री होने पर इन राशियों पर अशुभ प्रभाव डालेंगे। हालांकि साल 2023 में शनि के मार्गी होते ही धनु, मिथुन व तुला राशि से शनि का अशुभ प्रभाव पूरी तरह से हट जाएगा।

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शनि का कितने समय में होता है राशि परिवर्तन-

शनि एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करने में करीब ढाई साल का वक्त लेते हैं। ऐसे में शनि को एक चक्र पूरा करने में करीब 30 साल का समय लगता है। शनि को सभी ग्रहों में धीमी गति से चलने वाला ग्रह माना जाता है। वर्तमान में शनि मकर राशि में हैं और 29 अप्रैल 2022 में राशि परिवर्तन करते हुए कुंभ राशि में गोचर करेंगे।

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शनि की साढ़े साती व शनि ढैय्या से बचाव के उपाय-

शनिदेव को न्याय प्रिय देवता माना जाता है। कहा जाता है कि शनिदेव लोगों को उनके कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। ऐसे में शनि की महादशा के दौरान गलत कार्यों को करने से बचना चाहिए। इस दौरान झूठ और कठोर वचन आदि नहीं बोलना चाहिए। बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। शनि के अशुभ प्रभावों से बचने के लिए हनुमान जी की पूजा करनी चाहिए। मान्यता है कि हनुमान जी की पूजा करने से शनि दोष से मुक्ति मिलती है। इसके अलावा शनिवार के दिन हनुमान जी के मंदिर जाकर हनुमान चालीसा का पाठ करें। हालांकि कोरोना काल में घर के मंदिर में ही हनुमान चालीसा का पाठ किया जा सकता है। भगवान शिव की पूजा से भी शनिदेव प्रसन्न होते हैं। शनि मंत्रों का जाप करने से लाभ होता है। शनिवार के दिन शनिदेव से जुड़ी चीजों का दान करना लाभकारी साबित होता है। पीपड़ के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना चाहिए।

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