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मकर, कुंभ,मीन, कर्क, वृश्चिक वालों के लिए 10 दिसंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण, ये उपाय दिलाएगा शनि की साढ़ेसाती से छुटकारा

Pradosh Vrat Shani Sade Sati : शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के लिए प्रदोष व्रत के दिन लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ जरुर करना चाहिए। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है।

मकर, कुंभ,मीन, कर्क, वृश्चिक वालों के लिए 10 दिसंबर का दिन बेहद महत्वपूर्ण, ये उपाय दिलाएगा शनि की साढ़ेसाती से छुटकारा
Yogesh Joshiलाइव हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीSat, 09 Dec 2023 05:40 AM
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Pradosh Vrat Shani Sade Sati : भगवान शंकर और माता पार्वती की कृपा से व्यक्ति को सभी तरह के सुखों का अनुभव होता है। इस समय मकर, कुंभ, मीन राशि पर शनि की साढ़ेसाती और वृश्चिक, कर्क राशि पर शनि की ढैय्या चल रही है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या लगने पर व्यक्ति को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से मुक्ति के लिए प्रदोष व्रत के दिन लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ जरुर करना चाहिए। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का बहुत अधिक महत्व होता है। प्रदोष व्रत के दिन भगवान शंकर और माता पार्वती की विधि- विधान से पूजा की जाती है। इस व्रत में प्रदोष काल में पूजा करने का बहुत अधिक महत्व होता है। मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष का प्रदोष व्रत 10 दिसंबर, रविवार को है। रविवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। लिंगाष्टकम स्तोत्र का पाठ करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। आगे पढ़ें लिंगाष्टकम स्तोत्र-

  • लिंगाष्टकम स्तोत्र

ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम् ।
जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥1॥ 

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देवमुनिप्रवरार्चितलिङ्गं कामदहं करुणाकरलिङ्गम् ।
रावणदर्पविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥2॥

सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम् ।
सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥3॥

कनकमहामणिभूषितलिङ्गं फणिपतिवेष्टितशोभितलिङ्गम् ।
दक्षसुयज्ञविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥4॥

कुङ्कुमचन्दनलेपितलिङ्गं पङ्कजहारसुशोभितलिङ्गम् ।
सञ्चितपापविनाशनलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥5॥

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देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम् ।
दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥6॥

अष्टदलोपरिवेष्टितलिङ्गं सर्वसमुद्भवकारणलिङ्गम् ।
अष्टदरिद्रविनाशितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥7॥

सुरगुरुसुरवरपूजितलिङ्गं सुरवनपुष्पसदार्चितलिङ्गम् ।
परात्परं परमात्मकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम् ॥8॥

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लिङ्गाष्टकमिदं पुण्यं यः पठेत् शिवसन्निधौ।
शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते॥

(इस आलेख में दी गई जानकारियों पर हम यह दावा नहीं करते कि ये पूर्णतया सत्य एवं सटीक हैं। विस्तृत और अधिक जानकारी के लिए संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।)

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