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25 फरवरी, 2020|4:30|IST

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शनि का राशि परिवर्तन: अष्टकवर्ग नियमों में बताया गया राशियों पर शनि का प्रभाव, जानें आप पर क्या होगा प्रभाव

ashtakvarga rules on zodiac signs

Shani ka Rashi Parivartan 2020: यह बड़ा सुअवसर है कि शनि स्वग्रही होने जा रहे हैं। यह अवसर करीब 30 वर्ष बाद आया है। 24 जनवरी 2020 को शनि अपनी मकर राशि में पहुंचेंगे। शनि का एक ग्रह में ढाई वर्ष का कार्यकाल होता है। यह पूरे जनमानस के लिए सुखद समाचार है। यहां एक बात स्पष्ट करनी जरूरी है कि साढ़े साती या  ढैया से डरने की जरूरत नहीं है। इनका इतना डरावना असर नहीं होता है। साढ़े सात साल किसी के जीवन में एक जैसा फल नहीं हो सकता है। पूरे ढाई वर्ष शनि एक जगह बैठते हैं। उस घर, गोचर का फल देते हैं। यह सिर्फ राशि से नहीं होता है। 

राशि से जरूर फर्क पड़ता है लेकिन अष्टकवर्ग के नियम में आप जाएंगे तो आपकी कुंडली में शनि कहां विद्यमान हैं, यह बहुत महत्वपूर्ण है। केवल चंद्रमा से शनि का गोचर नहीं देखा जाएगा। आपके लग्न से भी शनि का गोचर देखा जाएगा। शनि से भी शनि का गोचर देखा जाएगा। तो साढ़े साती और  ढैया जैसे शब्दों के डर से बाहर निकलने की जरूरत है। अन्य ग्रहों का क्या? शनि जब लग्न में जाएंगे तो लग्न का फल देंगे। द्वितीय भाव में जाएंगे तो द्वितीय का और तृतीय भाव में जाएंगे तो तृतीय का फल देंगे। चतुर्थ में जाएंगे तो चतुर्थ का। हर जगह शनि का अपना फल देंगे। शनि का फल ढाई वर्षों तक चलता है।

एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि शनि को काल पुरुष का दो घर मिला है। दशम और एकादश। दशम न्याय, राजसत्ता पक्ष, कानून का घर है। कहीं भी आप कठिनाई में पड़ते हैं तो कहते हैं कि कोर्ट में चलेंगे। न्यायाधीश के पास चलेंगे। न्यायाधीश आपके कर्मों की सजा देते हैं। शनि काल पुरुष का एकादशेश है। एकादशेश कभी भी खराब फल नहीं देते हैं। शनि कभी किसी को गलत या अन्याय भरा फल नहीं देते हैं। तो आप निश्चिंत रहें।  ढैया और साढ़े साती से ऊपर उठ जाएं। आपको सही परिणाम मिलेगा। आइए गोरखपुर के ज्‍योतिषाचार्य पंडित नरेन्‍द्र उपाध्‍याय से जानते हैं कि शनि के इस राशि परिवर्तन का सभी 12 राशियों पर क्या पड़ेगा प्रभाव।
 
मेष-

दशम भाव का स्वग्रही शनि रोजी-रोजगार में तरक्की और न्याय दिलाएगा। पैतृक सम्पत्ति में न्याय कराएगा। रीढ़ की हड्डी से जुड़ी कोई समस्या है तो उसमें लाभ दिलाएगा। जिसका गलत ढंग से जमीन-जायजाद हड़प लिया गया उसे यह दिलाकर जाएगा। शारीरिक आरोग्यता, नौकरी-चाकरी में बढ़ोत्तरी, बेरोजगारों को रोजगार, पिता के स्वास्थ्य में लाभ सहित हर दृ़ष्टिकोण यह आपको लाभ देने वाला है। यदि इसके विपरीत आपने किसी से कोई घर या चीज हड़पी है तो नुकसान हो सकता है।

वृषभ-
भाग्य में वृद्धि होगी। भाग्यवश कोई काम बनेगा। रोजी रोजगार में तरक्की करेंगे। धार्मिक यात्रा करेंगे। आप शुद्ध होने जा रहे हैं। आपके अंदर की जितनी भी बुराइयां, अवसाद थे, सब निकल रहे हैं। निस्तेजता खत्म होगी। उर्जा का संचार होगा। शारीरिक, मानसिक और रोजगार में इजाफा होने वाला है। जितनी अशुभताएं थीं वे खत्म होने वाली हैं।

मिथुन-
थोड़ी कठिनाई या परेशानी का योग बन रहा है। यदि आप रिसर्च फील्ड से हैं किसी भी विषय पर शोध कर रहे हैं। किसी के मन अंदर के बारे में जानना चाहते हैं। रहस्यों के बारे में जानना चाहते हैं। मनोविज्ञान के छात्र-छात्रा हैं तो यह आपके लिए उत्तम समय है। लेखकों, कवियों के लिए उत्तम समय है। स्वास्थ्य पर ध्यान देने की जरूरत है। हड्डियों में चोट लगने की आशंका है। लेकिन ज्ञानार्जन के लिए अच्छा समय है। शनि यदि किसी भी तरह की कोई समस्या देगा तो उससे कई गुना राहत देकर जाएगा।

कर्क-
सप्तम भाव में शनि का गोचर है। जीवनसाथी से कुछ अच्छे समाचार की प्राप्ति होगी। वैवाहिक या प्रेम के जीवन में चली आ रही परेशानियां खत्म होंगी। अच्छे जीवन में प्रवेश कर रहे हैं। यदि आप कानून के छात्र हैं या किसी भी प्रकार से न्यायालय से जुड़े हुए हैं तो यह आपके लिए विशेष अवसर है। शादी ब्याह तय हो सकता है। रोजी रोजगार में तरक्की कर सकते हैं। चोट लगने का थोड़ा डर रहेगा। इसके अलावा शारीरिक स्थिति ठीक होगी।

 

 

सिंह-
आप जितना भी डिस्टर्ब थे, राह के अवरुद्धों से वे सब खत्म होने वाले हैं। विरोधी परास्त होंगे। घुटने टेक देंगे। बहुत कुछ सीखेंगे। ज्ञानार्जन का समय है। रहस्यों को जानेंगे। बहुत कुछ सीखेंगे। रोग खत्म होंगे। ननिहाल पक्ष से लाभ मिलेगा। बुजुर्गों का आशीर्वाद मिलेगा। छोटों से, सेवकों से बहुत कुछ मिलने वाला है।

कन्या-
विद्यार्थियों, लेखकों, तकनीकी क्षेत्र, ज्योतिषियों के लिए बहुत अच्छा समय है। ज्ञानार्जन के क्षेत्र में जो भी करना चाहते है, शनिदेव ने रास्ते खोल दिए हैं। लाभ लीजिए। शारीरिक आरोग्यता, निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता। अवसाद ग्रस्त लोगों के लिए वरदान है। संतान से सम्बन्धित समस्या भी समाप्त होने जा रही है।

तुला-
मां के स्वास्थ्य में सुधार होगा। भूमि-भवन-वाहन की खरीदारी होगी। यद्यपि की चतुर्थ भाव का शनि है। चारों तरफ यही कहा गया है कि चतुर्थ भाव का शनि घर में अवसाद देगा। कलह कराएगा लेकिन स्वग्रही शनि सब कुछ देगा। भौतिक सुख-सुविधाओं में वृद्धि कराएगा। जीवन में तरक्की करेंगे आप। घर में कुछ उत्सव हो सकता है। हृदय रोग से निजात मिल सकती है। रक्तचाप सुधर सकता है। निर्माण क्षेत्र के लोगों के भी वरदान जैसा समय है।

वृश्चिक-
उर्जा बढ़ती जा रही है। बहुत अच्छा समय है। कार्यों की शुरुआत होगी। नए व्यवसाय डालेंगे। नौकरी चाकरी के लिए बहुत अच्छा समय है। नए अनुबंध प्राप्त करेंगे। नए लोगों से मिलेंगे। जीवन में तरक्की करेंगे। नाक, कान, गला और भुजाओं से सम्बन्धित समस्याएं ठीक हो जाएंगी। हर दृष्टिकोण से उत्तम समय है।

धनु-
जो इतने दिनों से समस्या चल रही थी, खत्म हो जाएगी। हर दृष्टिकोण से उत्तम समय है। निरंतर तरक्की कर रहे हैं। लिक्विड फंड में बढ़ोत्तरी होगी। कुटुम्बों में वृद्धि होगी। किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं दिख रही है। अच्छे लोगों से अनुबंध प्राप्त करेंगे। धन की स्थिति अच्छी होगी। ढाई साल में आपने जितना गंवाया है सूद समेत वापस मिलेगा।

मकर-
उर्जा की कमी खत्म हो गई। सौम्यता बढ़ गई। चमकेंगे सितारों की तरह। रोजगार में तरक्की में होगी। शारीरिक आरोग्यता मिलेगी। जीवन में शुभता होगी। हर दृष्टिकोण से उत्तम समय है। किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं है। वृहस्पिति के द्वादश भाव में होने की वजह से थोड़ा खर्च बढ़ेगा लेकिन यह सारा खर्च शुभ कार्यों में होगा।

कुंभ-
लग्नेश द्वादश भाव में है लेकिन स्वग्रही है। आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है। शनि द्वादश भाव में रहकर जो नकारात्मक असर देते हैं वो नहीं देंगे। बाहर से तार जुड़ेंगे। विदेशों से सम्पर्क बनेगा। नई सम्बन्ध बनेंगे। जीवन में तरक्की करेंगे। जिनकी साझेदारी खराब हो रही थी वो सुधर जाएगा। हर दृष्टिकोण से उत्तम समय है।

मीन-
दशम भाव का वृहस्पिति, एकादश भाव का शनि हर दृष्टिकोण से उत्तम लाभ दिला रहा है। जीवन में तरक्की कर रहे हैं। व्यवसाय में लाभ, आरोग्यता, प्रेम में बढ़ोत्तरी के साथ ही नए नए सुअवसर मिल रहे हैं। हर दृष्टिकोण से अच्छा समय है।

शनिदेव से शुभ फल प्राप्त करने का मंत्र-

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं शनैश्चराय नम:

प्रस्‍तुति-
अजय कुमार सिंह
गोरखपुर।

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