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शब ए बारात : आज है गुनाहों से छुटकारे की रात

shabe barat

इस्लामी कैलेंडर के हिसाब से आठवें महीने शाबान की 15 वीं तारीख को शब-ए-बरात के नाम से जाना जाता है। यह रात इबादत के साथ ही दिन में रोजा रखने की तरफ भी इशारा करता है। इस दिन रोजा रखकर इंसान इबादत और कुरआन की तिलावत में गुजार दें और जाने-अंजाने में किए गए गुनाहों का पश्चाताप करते हुए साफ दिल से तौबा करे तो उसके सब गुनाह माफ हो जाते हैं। इस रात में इंसान अपने एक साल के किए गए कार्यों का भी जायजा लेता है। 

जामियां इत्तेहादुल ओलूम के मौलाना इलियास ने बताया कि इस दिन सूर्यास्त से सूर्योदय तक रहमतों की बारिश होती है। शब-ए-बरात को दिन में रोजा रखने व रात में इबादत करने वालों की हर गुनाह माफ कर दिए जाते हैं। यह रात को बुजुर्गी, रहमत और बरकत वाला भी बताया गया है।

इस रात में कब्रिस्तानों में जाकर दफन लोगों के लिए मुक्ति की दुआ भी की जाती है। एक हदीस में आता है कि शब-ए-बरात की रात नबी मुहम्मद साहब ने मदीने की कब्रिस्तान में जाकर पूर्वजों के लिए बक्शीश की दुआ मांगी थी। इस रात में खुदा फरमाता है कि है कोई बक्शीश मांगने वाला, है कोई रोजी मांगने वाला जिसको मैं रोजी दे सकूं। 

क्या कोई मुसीबत जदा है, जिसको मैं मुसीबत से दूर कर दूं। जब बंदा अपने गुनाहों के लिए रोता है और आइन्दा गुनाह न करने की कसम खाता है। तब अल्लाहतआला उसके सब गुनाह माफ कर देते हैं। वहीं जो लोग इस रात को सो कर गुजार देते हैं और इबादत नहीं करते हैं। वह मगफिरत से महरूम हो जाते हैं।

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