Sawana special: Kailash Dham temples here all wishes are fulfilled by the offerings - सावन विशेष : गिनती के मंदिरों में कैलाश धाम, यहां प्रसाद चढ़ाने से पूरी होती हैं मन्नतें DA Image
19 नबम्बर, 2019|9:49|IST

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सावन विशेष : गिनती के मंदिरों में कैलाश धाम, यहां प्रसाद चढ़ाने से पूरी होती हैं मन्नतें

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भोलेनाथ की मस्ती में दुनियां चूर है। भांग, धतूरा, बेलपत्र आदि चढ़ाकर भक्त भोलेनाथ को मगम करने में आस्थावान हैं। वहीं सीतापुर में नैमिष से करीब 12 किलोमीटर दूरी पर स्थित पौराणिक शिवालय के खबीसनाथ बाबा की सामाधि स्थल पर श्रद्धालु शराब चढ़ाकर मन्नतें पूरी होने की कामना कर रहे हैं। धार्मिक विद्यानों की मानें तो महाकालेश्वर उज्जैन, कैलाश आश्रम सरीखे दुनियां में गिनती के मंदिर हैं, जहां दारू का प्रसाद चढ़ता है। 

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पैराणिक शिवालय एक प्राचीन टीला पर स्थित है। सुरम्य वातावरण के चलते मंदिर केआसपास बंदरों की भरमार है। बंदर शिवालय में आने वाले श्रद्धालुओं को नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। ग्रामीण इस मंदिर की प्राचीनता के बारे में नहीं जानते। महर्षि दधीचि के अस्थिदान के बाद इस मंदिर के वृतांतों का जिक्र पुराणों में है। धार्मिक मान्यता है कि सभी तीर्थों के साथ यहां स्वयं कैलाश मानसरोवर भी आए थे। मंदिर के पास स्थित छोटा कुण्ड मानसरोवर झील का प्रतीक है। प्राचीन शिवमंदिर के पुजारी रामप्रकाश ने बताया पास में स्थित गांव सोनितपुर दरसल शोणितपुर का अपभ्रंश है। मान्यता है कि परम शिवभक्त बाणासुर की पुत्री भी यहां पूजा करने आई थी। वर्तमान में भी सैकड़ों शिवभक्त कैलाश धाम स्थित बाबा खबीस नाथ का दर्शन करने आते हैं। खबीस नाथ पर दारू का प्रसाद चढ़ाकर वरदान मागते हैं। चढ़ी हुई शराब बंदरों में बांटी जाती है। 

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गुप्त गुफा में तपस्या के प्रमाण

कैलाश धाम में खबीसनाथ के बाद स्वामी सम्पूर्णानंद पुजारी बने। स्वामी सम्पूर्णानंद तपस्वी थे। ध्यान के लिए उन्होंने मंदिर परिसर में गुफा बनाई थी। श्रद्धालु गुफा को पवित्र मानकर दर्शन करते हैं। इसमें तपस्या के प्रमाण भी मिलते हैं। पुराणों में कैलाश तीर्थ को कैलाश मानसरोवर की संज्ञा दी गई है। जिस टीले में मंदिर स्थित है वह टीला भी महर्षि दधीचि के समय का बताया जाता है।

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