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Sawan 2021 : सावन में रोजाना ऐसे करें इस मंत्र का जाप

 अनीता जैन ,ऩई दिल्लीPublished By: Anuradha Pandey
Wed, 28 Jul 2021 03:40 PM
Sawan 2021 : सावन में रोजाना ऐसे करें इस मंत्र का जाप

भिन्न ग्रंथों में लिखा मिलता है कि सभी देवताओं की आत्मा में रुद्र उपस्थित हैं। रुद्र अर्थात शिव, और सभी देवता रुद्र की आत्मा हैं। ‘वेद: शिव:, शिव: वेद:’ अर्थात वेद ही शिव हैं और शिव ही वेद हैं। श्री लिंग पुराण के अनुसार, शिवलिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य में तीनों लोकों के ईश्वर श्री विष्णु तथा ऊपरी भाग में प्रणव संज्ञक महादेव रुद्र सदाशिव स्थित रहते हैं। 
     शिवलिंग की वेदी महादेवी अम्बिका हैं, वे (सत, रज, तम) तीनों गुणों से युक्त रहती हैं। जो प्राणी उस वेदी के साथ शिवलिंग की पूजा करता है, वह शिव-पार्वती की कृपा सहजता से प्राप्त कर लेता है। शिवलिंग की पूजा में किसी भी तीर्थ जल, समुद्र जल, गंगाजल से अभिषेक करना शिव जी को अत्यंत प्रिय है, किन्तु गंगाजल के द्वारा भगवान भोलेनाथ का अभिषेक सर्वोत्तम माना गया है। ऐसा माना जाता है कि सावन माह में की गई शिव पूजा तत्काल शुभ फलदायी होती है। इसके पीछे स्वयं शिव का ही वरदान है। सावन में शिव जी का जाप करना सभी रोग-दोषों से मुक्त करेगा।
भगवान शिव सृष्टि को नियंत्रित करने वाले देवों के देव माने जाते हैं। ‘ॐ नम: शिवाय’ के जाप में अ, उ, म से उत्पन्न नाद ‘ॐ’ भी उन्हीं का पर्याय है। शिवपुराण के अनुसार, शिव अर्थात सृष्टि के सृजनकर्ता को प्रसन्न करने के लिए सिर्फ ‘ॐ नम: शिवाय’ का जप ही काफी  है। भोलेशंकर इस मंत्र से बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं।
 स्कंद पुराण में कहा गया है - ‘ॐ नम: शिवाय’ महामंत्र जिसके मन में वास करता है, उसके लिए बहुत से मंत्र, तीर्थ, तप व यज्ञों की क्या जरूरत है। यह मंत्र मोक्ष प्रदाता है, पापों का नाश करता है और साधक को लौकिक, पारलौकिक सुख देने वाला है। इस जाप में ‘नम: शिवाय’ की पंच ध्वनियां सृष्टि में मौजूद पंचतत्त्वों का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिनसे सम्पूर्ण सृष्टि बनी है और प्रलयकाल में उसी में विलीन हो जाती है। क्रमानुसार 
‘न’ पृथ्वी, ‘म:’ पानी, ‘शि’ अग्नि, ‘वा’ प्राणवायु और ‘य’ आकाश को इंगित करता है। इसीलिए शिव के इस पंचाक्षर मंत्र में सृष्टि के पांचों तत्त्वों को नियंत्रित करने की क्षमता है और इसका जाप नियमित करने पर शिव की असीम कृपा प्राप्त होती है।  

कैसे जपें मंत्र 
‘ॐ नम: शिवाय’ का जाप हमें शिवालय, तीर्थ या घर में साफ, शांत और एकांत जगह में बैठकर करना चाहिए। ‘ॐ नम: शिवाय’ का जाप कम से कम 108 बार हर दिन रुद्राक्ष की माला से करना चाहिए, क्योंकि रुद्राक्ष शिवजी को अतिप्रिय है। जाप हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। यदि आप गंगा के किनारे शिवलिंग की स्थापना और पूजन के बाद जाप करेंगे, तो उसका फल सबसे उत्तम होगा। शिव के ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र का जाप किसी भी समय किया जा सकता है, किंतु शुद्धता का विशेष ध्यान रखें। धार्मिक लाभ के अलावा ‘ॐ नम: शिवाय’ मंत्र स्वास्थ्य लाभ भी देता है। इसके उच्चारण से समस्त इंद्रियां जाग उठती हैं।

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