DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

सावन 2019: पौराणिक पृथ्वीनाथ मंदिर में होती है शिव भक्तों की मनोकामना पूरी

gonda mandir

हिन्दू धर्म के अनुसार सावन मास को शिवत्व के अनुरूप वर्ष का सबसे पवित्र महीना माना जाता है। सप्ताहिक दिन सोमवार को शिव की उपासना का दिन माना गया है। इस बार सावन की शुरुआत 17 जुलाई से हो गई है। सावन में 4 सोमवार पड़ रहे हैं। इस मास में भगवान शिव माता पार्वती के साथ पृथ्वी लोक पर आते हैं, और अपने भक्तों की दुःख दर्द सुनते हैं व उनकी मनोकामना पूरी करते हैं। पुराणों और धर्मग्रंथों के अनुसार सावन के महीने में ही माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उनकी मनोकामना पूरी की थी। अपनी अर्द्धांगिनी दोबारा मिलने के कारण भगवान शिव को श्रावण का यह महीना अत्यंत प्रिय हैं।

धार्मिक कथाओं के अनुसार सावन महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था।जिसमें निकले विष को भगवान शिव ने पी लिया। तब से उन्हें नीलकंठ का नाम मिला और इस तरह उन्होंने पूरी सृष्टि को इस विष से बचाया। इसके बाद सभी देवताओं ने उन पर जल डाला था। इसी कारण शिव अभिषेक में जल का विशेष स्थान हैं। मान्यता हैं कि सावन के महीने में भगवान शिव ने धरती पर आकार अपने ससुराल (पृथ्वीलोक) में विचरण किया था। जहां अभिषेक कर उनका स्वागत हुआ था, इसलिए इस माह में अभिषेक का महत्व बताया गया हैं।

खरगूपुर के निकट अवस्थित पृथ्वीनाथ भीमेश्वर महादेव अपने सभी भक्तों की सुनते हैं, और उनके सारे दुखों व संकटों को हर लेते हैं। जिससे यहां शिव भक्त आते हैं।सावन मास,अधिमास,गंगा दशहरा, महाशिवरात्रि, मास शिवरात्रि, कजरी तीज आदि दिनों पर अपार शिव भक्त जलाभिषेक करते हैं।इस मंदिर की किवदंतिया महाभारत काल से जुड़ी हैं। शिव भक्तों का कहना है कि यहाँ भगवान भोलेनाथ का साक्षात दर्शन होते हैं उनके दर्शन मात्र से अलौकिक पुण्य मिलता है। 

Read Also : Sawan 2019: कठिनाइयों से उबरने में मदद करता है असली रुद्राक्ष, जानें कैसे मिलेगा फायदा

यह है किवंदतियां: पांडवों द्वारा स्थापित विख्यात पृथ्वीनाथ मन्दिर परिसर बड़ी संख्या मे शिव भक्त यहां पहुचते हैं।विशालकाय भव्य शिव लाट पर बड़ी संख्या में महिला-पुरुष काँवरिया श्रद्धालु जल,दुग्ध,पुष्प, शमी,बेलपत्री,भांग व धतूर से जलाभिषेक करेंगे।लोगों का मानता है कि यहाँ पाँचों पांडवों में से भीम द्वारा स्थापित काले-कसौटे पत्थर से निर्मित साढ़े पाँच फुट ऊँचा विशालकाय शिव लाट एशिया महाद्वीप का सबसे बड़ा शिवलाट है। इस एका चक्रानगरी में अज्ञातवास के दौरान पाँचों पांडव यहां अपनी माता कुन्ती के साथ एक गरीब ब्राह्मण के घर रुके थे।यहां पर बाकासुर नाम का एक राक्षस रहता था,जिसको खाने के लिए एक बैलगाड़ी अनाज व एक मनुष्य की प्रतिदिन जरूरत होती थी।

राजा मानसिंह ने एक बैलगाड़ी अनाज स्वयं तथा एक मनुष्य की व्यवस्था स्वयं ग्रामीणों को करने के लिये कहा था।एक डिंजिस घर में माता कुंती रुकी थी,उस ब्राह्मण के एक ही पुत्र था।जिसको राक्षस के भोजन को लेकर जाना था।माता कुन्ती ने यह सुना तो उन्होंने अपने बेटे भीम को भोजन लेकर भेज दिया।इस चक्रा नगरी में बाकासुर और भीम के बीच महायुद्ध हुआ और अंत में बाकासुर का अंत हो गया।लेकिन यह राक्षस पूर्व जन्म में ब्राह्मण था,इसलिए भीम को ब्रह्म हत्या लग गया।पंडितों ने बताया कि ब्रह्म हत्या से छुटकारा पाने के लिए शिवलाट की पूजा-अर्चना करना होगा।इस पर भीम ने यहाँ पर शिवलाट की स्थापना की।कालान्तर में खरगूपुर के राजा मानसिंह के आदेश पर यहां के निवासी पृथ्वीसिंह घर बनवाने के लिए खुदाई करा रहे थे।तभी उनको यह विशालकाय शिवलाट दिखाई पड़ा।पृथ्वीसिंह ने साफ-सफाई कराकर पूजा-अर्चना प्रारम्भ शुरू की।आज यह मंदिर  पृथ्वीनाथ के नाम से प्रसिद्ध है।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:Sawan 2019 Prithvi Nath Temple gonda worship wish Shiv Shankar
Astro Buddy