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16 अक्तूबर, 2020|8:45|IST

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Sarv Pitru Amavasya 2020: मंगलकामना के साथ श्रद्धा से करें पितरों को विदा

अश्विन माह की अमावस्या को पितृ हमसे विदा लेते हैं। समस्त पितरों का इस अमावस्या पर श्राद्ध किए जाने के कारण इस तिथि को सर्वपितृ अमावस्या कहा जाता है। इसे पितृ विसर्जनी अमावस्या या महालया भी कहा जाता है। इस अमावस्या पर सभी ज्ञात-अज्ञात पितरों का श्राद्ध किया जाता है। माना जाता है कि महालया में मां दुर्गा ने असुरों का नाश किया था। यह भी मान्यता है कि इस दिन मां पार्वती कैलाश से अपने पुत्रों श्रीगणेश और कार्तिकेय से मिलने आती हैं। माना जाता है कि पितर किसी भी रूप में घर आ सकते हैं। इसलिए भूलकर भी घर पर आने वाले किसी भी जीव का निरादर न करें।

Sarv Pitru Amavasya 2020: आज है सर्व पितृ अमावस्या, पितरों को दी जाती है विदाई

ऐसे पूर्वज जिनकी मृत्यु की तारीख याद नहीं होती या फिर उनका श्राद्ध करना भूल जाते हैं तो इस दिन भूले बिसरे सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है। इस दिन सभी पितरों का स्मरण करना चाहिए। पितरों का जल और तिल से तर्पण करना चाहिए। पितरों की स्मृति में पौधारोपण करें। पितरों की पसंद का भोजन बनाकर पांच स्थानों में निकालना चाहिए। पहला हिस्सा गाय का, दूसरा देवों का, तीसरा हिस्सा कौए, चौथा हिस्सा कुत्ते और पांचवां चींटियों का होता है। जल का तर्पण करने से पितरों की प्यास बुझती है। इस अमावस्या पर श्राद्ध करने से पितरों को संतुष्टि प्राप्त होती है, साथ ही घर में सुख-समृद्धि आती है। प्रात: स्नानादि के पश्चात गायत्री मंत्र का जाप करते हुए सूर्यदेव को जल अर्पित करें। पितरों से मंगल कामना करें। सामर्थ्य के अनुसार दान करें। अगर पितर का नाम ज्ञात न हो तो भगवान का नाम लेकर तर्पण विधि करें।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।