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8 जुलाई, 2020|4:05|IST

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Kabir Das Jayanti 2020: आज भी लोगों के दिलों में बसे हैं संत कबीर

kabir das jayanti 2020

कहत सुनत सब दिन गए, उरझि न सुरझ्या मन, कहि कबीर चेत्या नहीं, अजहुं सो पहला दिन., कबिरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर, ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर. और ऐसे ही न जाने कितने दोहे कहकर लोगों को जीवन का दर्शन समझाने वाले संत कबीरदास आज भी प्रासंगिक हैं।

शुक्रवार को ज्येष्ठ पूर्णिमा है और कबीर जयंती भी इसी दिन है। इस अवसर पर शहर के विद्वानों ने कबीर के कृतित्व और व्यक्तित्व पर बात करते हुए उन्हें प्रासंगिक बताया। इतिहासविद पद्मश्री योगेश प्रवीन ने कहा कि कबीर हर दौर में समतावादी रहे। वह पाखंड के विरोधी थे।हिन्दू-मुस्लिम हर किसी को गलत बातों के लिए उन्होंने फटकार लगायी। उनका मानना था कि जीवन में जीने की उमंग रहे, और व्यक्ति से कोई गलत काम न हो। कबीर दास समाज को रूढ़ियों और सामाजिक भेदभाव की बेड़ियों से मुक्त कराना चाहते थे।

वरिष्ठ व्यंग्यकार गोपाल चतुर्वेदी कहते हैं कि कबीर हर समय प्रासंगिक रहे हैं और रहेंगे। उन्होंने जो जीवन मूल्य हमें सिखाए, वे भारत के शाश्वत मूल्य हैं। उनमें आस्था और विश्वास है। उन्हें हिन्दी व्यंग्य का पहला व्यंग्कार माना जाता है। उनके जैसी विभूतियां कम हैं, जिनके हर धर्म में अनुयायी हैं। उनके पद घर-घर में सुने जाते हैं।

नवाब आसफुद्दौला ने बनवाया कबीर मंदिर
पद्मश्री योगेश प्रवीन ने बताया कि नवाबी दौर में संतो का काफी सम्मान होता था। खदरा में बना कबीर मंदिर इसकी बानगी है। इसे नवाब आसफुद्दौला ने बनवाया था। कबीर इंसानियत और मोहब्बत के पैरोकार थे। उन्होंने हमेशा एकता और भाईचारे की बात की।

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  • Web Title:Sant Kabir Das Jayanti 2020 : know why Sant Kabir is always in people heart