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12 अक्तूबर, 2020|11:28|IST

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यहां से संजीवनी बूटी लाए थे पवनपुत्र, गांव वाले आज भी हैं नाराज

देवभूमि उत्तराखंड में एक गांव ऐसा भी है जहां के लोग पवनपुत्र हनुमान जी से आज तक नाराज हैं। यह गांव है द्रोणागिरि। इस गांव में हनुमान जी की पूजा नहीं की जाती है और न ही लाल पताका फहराई जाती है।  

चमोली क्षेत्र में आने वाले द्रोणागिरि गांव के लोगों में मान्यता है कि जब लक्ष्मण जी को शक्ति लगी तब हनुमान जी जिस पर्वत को संजीवनी बूटी के लिए उठाकर ले गए, वह यहीं स्थित था। द्रोणागिरि के लोग इस पर्वत की पूजा करते थे। ग्रामीणों के मुताबिक जिस वक्‍त हनुमान जी संजीवनी बूटी लेने आए, तब पहाड़ देवता ध्‍यान मुद्रा में थे। हनुमान जी ने पहाड़ देवता से इसके लिए अनुमति भी नहीं ली और न ही उनकी सा‍धना पूरी होने का इंतजार किया। इसलिए यहां के लोग हनुमान जी द्वारा इस पर्वत उठा ले जाने से नाराज हो गए।

कहा जाता है कि जब हनुमान जी यहां पहुंचे तो गांव में उन्हें एक वृद्धा दिखाई दी। उन्होंने पूछा कि संजीवनी बूटी किस पर्वत पर होगी। वृद्धा ने द्रोणागिरि पर्वत की तरफ इशारा कर दिया। हनुमान जी पर्वत पर गए लेकिन संजीवनी बूटी की पहचान नहीं कर पाए और पर्वत के काफी बड़े हिस्से को तोड़कर ले गए। बताते हैं कि इसका पता लगने पर गांव वासियों ने वृद्धा का सामाजिक बहिष्कार कर दिया और आज भी इस गांव के लोग अपने आराध्य पर्वत की विशेष पूजा पर महिलाओं के हाथ का दिया नहीं खाते हैं।

इस आलेख में दी गई जानकारियां धार्मिक आस्थाओं और लौकिक मान्यताओं पर आधारित हैं, जिसे मात्र सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर प्रस्तुत किया गया है।