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sakat chauth 2019: सकट चौथ का व्रत, जानें इसका महत्व

प्रत्येक चंद्र मास में दो चतुर्थी होती है। पूर्णिमा के बाद की चतुर्थी संकष्टी एवं अमावस्या के बाद आने वाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं। इस प्रकार 1 वर्ष में 12 संकष्टी चतुर्थी होती है जिनमें माघ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी विशेष फलदाई है। पंडित शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि इस वर्ष की यह विशेष चतुर्थी 24 जनवरी गुरुवार को यानि आज है। चंद्र देव का उदय रात्रि 9:10 पर होगा। चंद्रोदय के पश्चात लाल या पीला वस्त्र धारण करके ॐ गं गणपतए नमः मंत्र से सकल विघ्न विनाशक श्री गणेश जी का विधिपूर्वक पूजन करने और कम से कम 11 माला उक्त मंत्र का जप करने से मन वांछित फल की प्राप्ति होती है।

संकट चौथ व्रत का महत्व
सीतापुर रोड स्थित हाथी बाबा मन्दिर के ज्योतिषी आनन्द दुबे ने बताया कि यह व्रत स्त्रियां अपने संतान की दीर्घायु और सफलता के लिए करती है। इस व्रत के प्रभाव से संतान को रिद्धि-सिद्धि की प्राप्ति होती है तथा उनके जीवन में आने वाली सभी विघ्न–बाधायें गणेश जी दूर कर देते हैं। इस दिन स्त्रियां पूरे दिन निर्जला व्रत रखती है और शाम को गणेश पूजन तथा चंद्रमा को अर्घ्य देने के पश्चात् ही जल ग्रहण करती है।

sakat chauth 2019 : संतान की लंबी आयु के लिए किया जाता है सकट चौथ का व्रत

पूरे दिन मन ही मन श्री गणेश जी के नाम का जप करें। सूर्यास्त के बाद गणेश जी का पूजन करें। नैवेद्य के रूप में तिल तथा गुड़ के बने हुए लड्डु, ईख, गंजी (शकरकंद), अमरूद, गुड़ तथा घी अर्पित करें। ऐसी मान्यता है कि इस पूजन से भाई-बंधुओं में आपसी प्रेम-भावना की वृद्धि होती है। तिल के लड्डु बनाने हेतु तिल को भूनकर, गुड़ की चाशनी में मिलाया जाता है, फिर तिलकूट का पहाड़ बनाया जाता है, कहीं-कहीं पर तिलकूट का बकरा भी बनाते हैं। तत्पश्चात् गणेश पूजा करके तिलकूट के बकरे की गर्दन घर का कोई बच्चा काट देता है।

इस सप्ताह है संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी व्रत, पढ़ें सप्ताह के व्रत और त्योहार

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