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सकट चौथ 2019 : इस विधि से शाम को करें गणेश जी की पूजा, मिलेगा मनवांछित फल

ganesh chaturthi 2018

माताएं सकट चौथ का व्रत संतान की तरक्की, अच्छी सेहत और खुशहाली के लिए करती हैं। वैसे तो साल में 12 सकट चौथ आती है, मगर माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी का विशेष महत्व है। सकट चौथ को संकष्टि चतुर्थी, तिलकुटा चौथ, संकटा चौथ, माघी चतुर्थी भी कहा जाता है। 

इस दिन संकट हरण गणपति का पूजन होता है। इस दिन विद्या, बुद्धि, वारिधि गणेश तथा चंद्रमा की पूजा की जाती है। सकट चौथ पर गणेश जी के भालचंद्र स्वरूप के पूजन का विधान है। भालचन्द्र का अर्थ है जिसेक भाल अर्थात मस्तक पर चंद्रमा सुशोभित हो।

प्रात:काल नित्य क्रम से निवृत होकर षोड्शोपचार विधि से गणेश जी की पूजा करें। इसके बाद भालचंद्र गणेश का ध्यान करके पुष्प अर्पित करें। पूरे दिन गणेश जी के नाम का जप करना विशेष फलदायी होगा। सुर्यास्त के बाद स्नान कर के स्वच्छ वस्त्र पहन लें। अब अपनी घरेलु परंपरा के अनुसार विधिपूर्वक गणेश जी का पूजन करें।

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इस विधि से करें पूजा
एक कलश में जल भर कर रखें। धूप-दीप अर्पित करें। नैवेद्य के रूप में तिल तथा गुड़ के बने हुए लड्डु, ईख, शकरकंद, अमरूद, गुड़ तथा घी अर्पित करें। 

यह नैवेद्य रात्रि भर बांस के बने हुए डलिया या टोकरी से ढककर रख दिया जाता है। इस ढके हुए नैवेद्य को संतान ही खोलती है तथा भाई बंधुओं में बांटता है। ऐसी मान्यता है कि इससे भाई-बंधुओं में आपसी प्रेम-भावना की वृद्धि होती है। 

अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रकार के तिल और गुड़ के लड्डु बनायें जाते हैं। तिल के लड्डु बनाने हेतु तिल को भूनकर, गुड़ की चाशनी में मिलाया जाता है, फिर तिलकूट का पहाड़ बनाया जाता है, कहीं-कहीं पर तिलकूट का बकरा भी बनाते हैं। तत्पश्चात् गणेश पूजा करके तिलकूट के बकरे की गर्दन घर का कोई बच्चा काट देता है। 

गणेश पूजन के बाद चंद्रमा को कलश से अर्घ्य अर्पित करें। धूप-दीप दिखायें। चंद्र देव से अपने घर-परिवार की सुख और शांति के लिये प्रार्थना करें। इसके बाद एकाग्रचित होकर कथा सुनें। सभी उपस्थित जनों में प्रसाद बांट दें।

इस श्लोक से करें गणेश जी की वंदना

गजाननं भूत गणादि सेवितं,कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्॥

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  • Web Title:sakat chauth 2019 know evening puja vidhi and mantra for lord ganesh
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