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16 सितम्बर, 2020|8:00|IST

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Tulsidas Jayanti: जन्मस्थली ही विवादों के भंवर में फंसी तुलसी की पहचान

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मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की लीलाओं के वर्णन से रामचरित मानस की रचना कर विश्व में ख्याति प्राप्त करने वाले गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली राजापुर में स्थापित उनकी पहचान खतरे में है। हर साल सावन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाई जाने वाली तुलसीदास जयंती इस वर्ष 7 अगस्त को मनाई जाएगी। इस मौके पर हिन्दुस्तान ने तुलसी स्मारक की पड़ताल की तो मन विह्वल हो उठा। समितियों के आपसी विवाद की वजह से तुलसी स्मारक में ताला लटका हुआ है। रोजाना सैकड़ों लोग तुलसीदास की प्रतिमा का दर्शन कर उनकी पहचान देखने पहुंचते हैं, पर आपसी खींचतान के चलते चार वर्ष से भवनों में वीरानगी दिख रही है।

गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली चित्रकूट जिले का राजापुर कस्बा दशकों बाद तहसील का दर्जा पाने में तो सफल हुआ, लेकिन विकास में पीछे ही रहा। तुलसीदास जी की पहचान को संजोया जाए तो इसे पर्यटन का मुख्य केंद्र बनाया जा सकता है। गोस्वामी तुलसीदास का जन्म यहां संवत 1554 में सावन माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को यमुना तट पर हुआ था। उन्होंने 76 वर्ष की उम्र में रामचरित मानस की रचना शुरू की थी। उनका 126 वर्ष जीवनकाल रहा। संवत 1680 को सावन माह की तृतीया को गोस्वामी तुलसीदास ने अपना शरीर त्यागा था। यहां तुलसीदास के नाम पर तुलसी स्मारक, तुलसी जन्म कुटीर आदि कई भवन आज भी उनकी पहचान के तौर पर मौजूद हैं। तुलसी स्मारक में आपसी खींचतान व समितियों के विवाद के चलते साफ-सफाई, मरम्मत सब बंद है जिसके कारण इस ऐतिहासिक धरोहर में वीरानगी नजर आती है। बरसात के दौरान पूरे स्मारक हाल में पानी भर जाता है। बेशकीमती धरोहर व सीनरी, व प्रतिमाएं नष्ट हो रही हैं। हाल पर लगे कीमती दरवाजे, खिड़कियां दीमक खा रही है, जिससे स्मारक की सुंदरता खराब हो हो रही है। स्मारक के मेन गेट पर ताला जड़ा होने के कारण तीर्थयात्रियों को ऐतिहासिक धरोहर देखने के लिए बाहर से ही वापस जाना पड़ता है। 

मुगल शासक अकबर तुलसी से हुए थे प्रभावित
मुगल शासक अकबर गोस्वामी तुलसीदास के प्रति बहुत ही प्रभावित थे। उन्होंने प्रसन्न होकर 96 बीघा 6 विश्वा जमीन, हाट-घाट माफी में दिया था। कहा था कि इसे किसी को छीनने का अधिकार नहीं है। उस समय अंजहाई के नाम से पुरानी बस्ती में बाजार लगती थी। व्यापारी नावों के जरिए व्यापार करते थे। माफीदारी समाप्त होने के बाद अकबर बादशाह से मिली जमीन का अब कोई पता नहीं है। अंजहाई बाजार समाप्त हो चुकी है। तुलसी जन्मभूमि का विकास पिछड़ता चला गया।

tulsi smarak rajapur

 

तुलसी जन्म कुटीर में सुरक्षित है हस्तलिखित मानस
मानस मंदिर के पुजारी रामाश्रय त्रिपाठी बताते हैं कि अकबर बादशाह क जमाने में हाट-घाट से  मंदिर का खर्चा चलता था। उनके पूर्वज मंदिर की देखरेख करते रहे हैं। गोस्वामी तुलसीदास के शिष्य वंशज आज भी हस्तलिखित श्रीरामचरित मानस को सुरक्षित किए हुए हैं। जिसके दर्शन आने-जाने वाले श्रद्धालुओं कोकराए जाते हैं। मंदिर तक पहुंचने का रास्ता भी ठीक नहीं है। साफ-सफाई का कार्य केवल त्योहारों के समय तक ही सीमित  रहता है। मंदिर में सुरक्षा के काई इंतजाम भी नहीं हैं।

sri ramcharit manas original copy
 

प्रशासन करे पहल: मानदेय मिलना दूर की बात, यहां तो भोजन के भी पड़े हैं लाले
तुलसी स्मारक भवन के पुजारी श्रद्धानंद ने बताया कि स्मारक की मरम्मत व रखरखाव समिति के पदेन अध्यक्ष डीएम कई वर्ष पूर्व बने थे। लेकिन समितियों के विवाद के चलते प्रशासन ने भी स्मारक की तरफ ध्यान नहीं दिया है। तभी से स्मारक की दुर्दशा दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।

प्रशासन को चाहिए था कि धरोहर के लिए कुछ अपने स्तर पर करें ताकि तुलसी की जन्मस्थली को देश और दुनिया में पहचान मिल सके। पूर्व की समिति पुजारी को मासिक मानदेय व मन्दिर का खर्चा देती रही है। आज हालत यह है कि मानदेय खर्चे तो मिलना दूर की बात रही, भोजन के लाले पड़ रहे हैं।

 

भव्य तरीके से मनाया जाता है जयंती समारोह

गोस्वामी तुलसीदास की जयंती प्रत्येक वर्ष भव्य तरीके से मनाई जाती है। इस बार 522 वीं जयन्ती समारोह सात अगस्त को मनाया जा रहा है। जयन्ती मनाने के लिए कस्बे से लेकर आसपास के करीब आधा सैकड़ा गांवों के लोग रोजाना तुलसी जन्म कुटीर पहुंच रहे हैं। सन्त महात्माओं की टोली भजन-कीर्तन में जुटी है। श्रद्धालुओं को तुलसी की महिमा का बखान संग रोज उनकी रचित रामचरित मानस का पाठ सुनाया जाता है। 

मानस मन्दिर के पुजारी रामाश्रय त्रिपाठी बताते हैं कि अकबर बादशाह के जमाने में हाट-घाट से मन्दिर का खर्चा चलता था। उनके पूर्वज मन्दिर की देखरेख करते रहे हैं। गोस्वामी तुलसीदास के शिष्य वंशज आज भी हस्तलिखित श्रीरामचरित मानस को सुरक्षित किए हुए हैं। जिसके दर्शन आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को कराए जाते है। मंदिर तक पहुंचने का रास्ता भी ठीक नहीं है। साफ-सफाई का कार्य केवल त्योहारों के समय तक ही सीमित रहता है। मंदिर में सुरक्षा के कोई इंतजाम भी नहीं है।
 

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  • Web Title:saint tulsidas birthplace rajapur chitrakoot and dispute about the land